चांदी के साथ-साथ गिलट के आभूषणों का महत्व कभी कम नहीं हुआ है। जनवरी 2026 में चार लाख के पार कर चुकी चांदी के बाद अचानक गिलट के आभूषणों की मांग बढ़ती चली गई है। जब से अभी तक गिलट पर 500 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। गिलट से बने आभूषणों का एक बड़ा सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व रहा है। मुख्य रूप से तांबा, जस्ता और निकल का एक मिश्र धातु होने के बावजूद, अपनी चांदी जैसी चमक और कम कीमत के कारण यह भारतीय ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में कृत्रिम (आर्टिफिशियल) आभूषणों के लिए एक प्रमुख विकल्प है। व्यापारियों के बीच इसे जर्मन सिल्वर भी कहा जाता है। जनवरी 2026 से सितंबर आते आते इसकी कीमतों में 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। मथुरा में लगभग 350 व्यापारी गिलट के कारोबार से जुड़े हैं। गिलट की पायल, बिछिया, कड़े और करधनी जैसे आभूषणों को बनाने में एक लाख लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। बीते वर्ष कॉपर 800, चांदी 400000 और गिलट 700 रुपये थी जोकि अब कॉपर 1400, चांदी 250000 और गिलट 1200 रुपये हो चुकी है। कारीगरों ने भी डेढ़ से 2 रुपये तक मजदूरी बढ़ाई है। जब से गैस, सुहागा और डीजल के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है।