प्रतिमा के साथ-साथ प्रतिभा भी रहे अखंडित और महावीर को मानने के साथ-साथ महावीर की भी मानें।” श्री धर्मनाथ जैन कांच मंदिर, जैन भवन में चल रहे चातुर्मास के दौरान पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के पांचवें दिन कल्पसूत्र प्रवचन में मुनि डॉ. संयमरत्न विजय जी ने श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का संदेश दिया।