उम्र बढ़ने के साथ कदम भले ही धीमे पड़ जाएं, लेकिन चंदौली के कुछ बुजुर्गों ने उम्र को अपनी सक्रियता के आड़े नहीं आने दिया। कोई 96 वर्ष की उम्र में रोजाना 16 किलोमीटर नंगे पांव पैदल चलता है तो कोई 93 साल की उम्र में दस बीघे से अधिक खेत की निगरानी खुद करता है। कोई किताबों के बीच दिन गुजार रहा है तो कोई घर के कामों में हाथ बंटाकर खुद को सक्रिय रखे हुए है। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर ऐसे बुजुर्गों की दिनचर्या न केवल प्रेरणादायी है, बल्कि बदलती जीवनशैली के बीच सादगी, श्रम और सकारात्मक सोच का संदेश भी देती है।