श्रुतिमान शुक्ल कभी सड़क पर जाम से जूझते शहर, रोजगार के लिए दूसरे जिलों का रुख करने को मजबूर युवा और खेती में बेहतर आमदनी की उम्मीद लगाए किसान... बाराबंकी की विकास यात्रा का अगला पड़ाव इन सभी के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। जिले में छह हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले डिजिटल हाईवे की तैयारी है तो दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, रेलवे सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएं भी आकार ले रही हैं। इन योजनाओं का असली असर केवल सड़कों, इमारतों और पटरियों तक सीमित नहीं होगा। उम्मीद है कि इनसे लोगों के सफर का समय बचेगा, कारोबार को नए ग्राहक मिलेंगे, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को अपनी उपज के बेहतर बाजार मिल सकेंगे। राजधानी लखनऊ और रामनगरी अयोध्या के बीच बसे बाराबंकी में बीते पांच वर्षों के दौरान विकास से जुड़ी कई योजनाओं पर काम हुआ है। अमर उजाला ने दरियाबाद क्षेत्र के विधायक और प्रदेश सरकार में खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा तथा जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह से बातचीत की। इसमें जिले में चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं के साथ विकास की उन संभावनाओं की तस्वीर सामने आई, जिनका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से है।