एक पैर के सहारे उछल-उछलकर स्कूल जाने वाली सात वर्षीय रागिनी के संघर्ष की तस्वीर सामने आने के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आया है। रागिनी के इलाज के लिए बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम मनियर क्षेत्र स्थित उसके गांव रानीपुर पहुंची। टीम ने परिजनों से अब तक हुए इलाज और उसकी बीमारी से जुड़ी जानकारी ली। इसके बाद रागिनी को जिला अस्पताल लेकर पहुंची और एक्सरे समेत अन्य चिकित्सकीय जांच कर पूर्व में हुए इलाज की हिस्ट्री देखी गई। स्थिति का आकलन करने के बाद आर्थो सर्जन डॉक्टर करण चौहान, डॉ. अजित सिंह की टीम ने बेहतर उपचार के लिए उसे हायर सेंटर बीएचयू रेफर कर दिया। वहीं, रागिनी को बैट्ररी वाली ट्राई साइकिल के लिए कानपुर के एलिम्को कंपनी की टीम जांच की। मनियर ब्लॉक की दिघेड़ा ग्रामसभा के रानीपुर गांव निवासी रागिनी प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में कक्षा एक की छात्रा है। घर से स्कूल की दूरी करीब 400 मीटर है। सामान्य बच्चों के लिए यह दूरी भले ही छोटी हो, लेकिन रागिनी के लिए रोज स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। पैर काम नहीं करने के बावजूद उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी। वह एक पैर के सहारे कूदते हुए स्कूल जाती थी। रास्ते में थक जाने पर उसे बैठना पड़ता था। सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय ने बताया कि दुर्घटना के बाद रागिनी का पैर काम नहीं कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि बेहतर उपचार के जरिये उसके पैर को फिर से कार्यशील बनाया जा सके। हायर सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच के बाद आगे के उपचार की दिशा तय होगी। टीम बच्ची को लेकर बीएचयू जांच कराने के बाद आगे का इलाज कराया जाएगा।