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VIDEO: पौराणिक महत्व वाली तमसा नदी का अस्तित्व संकट में, नाले में तब्दील हुआ स्वरूप

अयोध्या के रुदौली में पौराणिक महत्व वाली तमसा नदी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। मवई क्षेत्र के लखनीपुर स्थित उद्गम स्थल से ही नदी की दुर्दशा चिंता का विषय बनी हुई है। कभी अपनी प्राकृतिक धारा के लिए पहचान रखने वाली नदी अब नाले में तब्दील होती जा रही है। जलकुंभी से नदी पटी पड़ी है। नगर का गंदा पानी और कचरा इसमें पहुंच रहा है। चीनी मिल का गंदा पानी भी नदी में गिरने से इसकी स्थिति खराब हो रही है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते नदी के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रही है। वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता ने तमसा नदी के तट पर प्रथम पड़ाव में विश्राम किया था। इसका उल्लेख रामचरितमानस में भी मिलता है। महर्षि वाल्मीकि का आश्रम भी तमसा नदी के तट पर होने की मान्यता है। धार्मिक और पौराणिक महत्व से जुड़ी यह नदी आज उपेक्षा का दंश झेल रही है। तमसा नदी मवई क्षेत्र के लखनीपुर स्थित उद्गम स्थल से निकलकर अमानीगंज, रुदौली, सोहावल, मिल्कीपुर, बीकापुर और तारुन सहित कई विकासखंडों से होकर गुजरती है। गोसाईंगंज में विभाजित होने के बाद अंबेडकरनगर के श्रवण क्षेत्र में बिसुही नदी से इसका संगम होता है। पौराणिक विरासत से जुड़ी तमसा नदी को बचाने के लिए सफाई, प्रदूषण पर रोक और जीर्णोद्धार की पहल जरूरी है।

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