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अयोध्या: 700 खाते खंगाले, चंपत राय के नाम एक भी नहीं

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में पुलिस ने करीब 700 बैंक खातों की पड़ताल की। ट्रस्टियों, आरोपितों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों के खातों का लेनदेन खंगाला गया। ट्रस्ट के बैंक खातों को भी जांच के दायरे में रखा गया। हालांकि, इस पूरी जांच में एक तथ्य सामने आया कि चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला। अदालत में दाखिल चार्जशीट में विवेचना से जुड़े इस तथ्य का उल्लेख है। पुलिस ने संदिग्धों के खातों में रकम की आवाजाही की भी पड़ताल की। यह देखा गया कि रकम किन खातों से होकर गुजरी और उसका आरोपितों से कोई संभावित संबंध था या नहीं। डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के खातों के लेनदेन को अन्य आरोपितों और संदिग्धों के खातों से मिलाकर देखा गया। चंपत राय के नाम कोई बैंक खाता नहीं मिलने की बात चार्जशीट में दर्ज है। कोर्ट में अधिवक्ता संघ ने भी उठाए सवाल चार्जशीट दाखिल होने के बाद बुधवार को कोर्ट में अधिवक्ता संघ की ओर से विवेचना पर सवाल उठाए गए थे। संघ की ओर से कहा गया कि साक्ष्य के रूप में दस अधिवक्ताओं के शपथपत्र दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। यह भी आरोप लगाया गया कि एसआईटी के गठन से पहले आरोपितों से बरामद रुपये जिस व्यक्ति के पास रखे गए थे, उसके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई। अधिवक्ता संघ ने आरोप लगाया कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अभियुक्त बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया, जबकि ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को अभियुक्त नहीं बनाया गया। संघ के अनुसार, प्रार्थनापत्र के माध्यम से इनके खिलाफ साक्ष्य भी दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने संज्ञान नहीं लिया। संघ ने इनके खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किए जाने की मांग की। इसके अलावा बरामद

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