रामलीला मैदान रविवार को प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। श्रीरामलीला महोत्सव में श्रीराम और कुंभकर्ण के बीच भीषण युद्ध का मंचन किया गया। रणभूमि में दोनों ओर से तीरों की बौछार हुई तो तलवार, गदा और भालों से भी प्रहार किए गए। युद्ध के रोमांचक दृश्यों के बीच भगवान ने अमोघ अस्त्र से कुंभकर्ण का वध हुआ। इसके बाद तोप के गोलों के धमाकों और आतिशबाजी के बीच लगभग 40 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया गया। रविवार की लीला का आरंभ लक्ष्मण के मूर्छा से जागने से हुआ। रामसेना के पराक्रम से चिंतित रावण ने युद्ध में अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए कुंभकर्ण को जगाने का निर्णय लिया। छह माह तक निद्रा में रहने वाले कुंभकर्ण को जगाने के लिए रावण स्वयं उसके महल पहुंचा। काफी प्रयासों के बाद कुंभकर्ण की निद्रा टूटी तो वह मदमस्त हाथी की भांति युद्धभूमि की ओर चल पड़ा। विशालकाय कुंभकर्ण के रणभूमि में उतरते ही युद्ध का रोमांच बढ़ गया।