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शिमला: रोहड़ू अस्पताल बना स्वास्थ्य सेवाओं का भरोसेमंद केंद्र, रोजाना 800 से 1000 मरीज पहुंच रहे

प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में लोगों को उनके घर के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इसी दिशा में नागरिक अस्पताल रोहड़ू शिमला जिले के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक जांच और उपचार सुविधाओं के कारण अब क्षेत्र के लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए शिमला का रुख करने की जरूरत पहले की तुलना में कम हो रही है। नागरिक अस्पताल रोहड़ू से रोहड़ू, जुब्बल, कोटखाई, चौपाल और डोडरा-क्वार क्षेत्र के अलावा पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के लोगों को भी स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। अस्पताल से करीब तीन लाख की आबादी लाभान्वित हो रही है। अस्पताल में कुल 200 बिस्तरों की क्षमता है और रोजाना औसतन 800 से 1000 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। वहीं प्रतिदिन औसतन 120 से 130 मरीजों को इनडोर उपचार दिया जाता है। अस्पताल में हर महीने करीब 100 से 120 बड़ी और छोटी सर्जरी तथा 110 से 115 प्रसव करवाए जा रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. रविंद्र शर्मा के अनुसार अस्पताल में 24 घंटे, सातों दिन आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में वर्तमान में 22 चिकित्सक और 24 स्टाफ नर्स कार्यरत हैं। मरीजों को सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, वेंटिलेटर सहित हाई डिपेंडेंसी यूनिट और विभिन्न ऑपरेशन थिएटर की सुविधा मिल रही है। अस्पताल में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मशीनों की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर इन मशीनों को मरीज के पास ले जाकर जांच की जा सकती है। करीब छह लाख रुपये की लागत से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित की गई है। इससे जांच शुरू हो चुकी है। इसके संचालन के लिए पांच चिकित्सकों को लाइसेंस प्रदान किया गया है। वहीं करीब 28 लाख रुपये की पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से भी जल्द जांच शुरू होने की संभावना है। इससे खासकर दुर्घटना और गंभीर स्थिति वाले मरीजों की जांच में समय की बचत होगी। रोहड़ू अस्पताल में चार बिस्तरों वाली डे-केयर कैंसर यूनिट स्थापित की जाएगी। इसके लिए स्वीकृति मिल चुकी है और डीपीआर भी तैयार की जा चुकी है। अस्पताल में वर्तमान में कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा दी जा रही है। अलग डे-केयर यूनिट शुरू होने के बाद मरीजों को कैंसर उपचार के लिए समर्पित सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल में हंस फाउंडेशन के सहयोग से छह बिस्तरों वाला डायलिसिस सेंटर संचालित हो रहा है। यहां मरीजों को निशुल्क डायलिसिस की सुविधा मिल रही है। वर्तमान में सेंटर में रोजाना करीब 12 मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित मरीजों के लिए एक डायलिसिस मशीन अलग से समर्पित रखी गई है। रोहड़ू अस्पताल में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से 50 बिस्तरों वाला क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाया जा रहा है। इस परियोजना में करीब 17 करोड़ रुपये भवन निर्माण और छह करोड़ रुपये चिकित्सा उपकरण व मशीनरी पर खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और करीब 15 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। ब्लॉक को लगभग दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इसमें आपातकालीन मरीजों के लिए 20 बेड, आईसीयू, लेबर रूम, दो ऑपरेशन थिएटर, आइसोलेशन वार्ड, लिफ्ट, रैंप और हीटिंग सिस्टम समेत अन्य सुविधाएं होंगी। ब्लॉक में समर्पित लैब भी बनाई जाएगी, जिससे माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित जांच और संक्रमण की पहचान में मदद मिलेगी। रोहड़ू अस्पताल में डुअल मोड 16-स्लाइस सीटी स्कैन मशीन स्थापित करने को सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। इसे आगामी दो महीने के भीतर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। नई मशीन से गंभीर बीमारियों और आपातकालीन मामलों में मरीजों की जांच और निदान में मदद मिलेगी। इससे लोगों को सीटी स्कैन के लिए दूसरे बड़े अस्पतालों में जाने की जरूरत कम होगी। अस्पताल में 50 यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक भी सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार समय पर रक्त उपलब्ध करवाने में इससे मदद मिल रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के इस विस्तार से रोहड़ू और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों के लोगों को स्थानीय स्तर पर उपचार, जांच और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

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