पंजाब में सजी चुनावी बिसात पर सियासी दलों ने विभिन्न मुद्दों और विवादों पर एक-दूसरे की घेराबंदी तेज कर दी है। ये राजनीतिक पार्टियां अपने विरोधियों को चुनावी ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत मुद्दों पर भी घेर रही हैं। पंजाब में ऐसा पहली बार नहीं है। पिछले चुनावों का ट्रेंड देखें तो पार्टियां सूबे में चुनाव से इतर मुद्दों का इस्तेमाल अपने विरोधियों के खिलाफ सियासी हथियार के रूप में करती आई हैं। सोशल मीडिया से लेकर जनता के बीच इन मुद्दों को खूब उछाला जा रहा है। सूबे की सियासत का मिजाज देखें तो इस तरह के मुद्दे और विवाद चुनाव के दौरान असरदार साबित होते हैं। चुनावी मुद्दों से अलग व्यक्तिगत विवादों, निजी बयानों और गैर-पारंपरिक मुद्दों का चुनावों पर काफी गहरा और निर्णायक असर पड़ता है। राजनीतिक मामलों के जानकार जगतार सिंह कहते हैं कि ऐसे मुद्दे और विवाद चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच एक धारणा बनाते हैं और इससे संबंधित उम्मीदवार व पार्टी को जूझना पड़ता है। चूंकि इस समय सोशल मीडिया का खासा प्रभाव है, लिहाजा ये मुद्दे मतदाताओं, खासकर युवाओं पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं।वे कहते हैं कि चूंकि पंजाब एक पंथक सूबा है, इसलिए पंथ से जुड़े मुद्दे व विवाद यहां चुनाव के दौरान ज्यादा संवेदनशील बनते हैं। इन दिनों सभी राजनीतिक दल ऐसे ही मुद्दों और विवादों के सहारे अपनी-अपनी चुनावी जमीन तैयार कर रहे हैं।