पंजाब सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों, विशेष रूप से स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत देने के फैसले का शिक्षकों और प्रिंसिपलों ने स्वागत किया है। शिक्षकों का कहना है कि अतिरिक्त ड्यूटी के कारण उनकी कक्षाओं से अनुपस्थिति का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। अब शिक्षकों के स्कूल में उपलब्ध रहने से पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा। स्कूल ऑफ एमिनेंस, माल रोड की प्रिंसिपल मनदीप कौर ने कहा कि सरकार के आदेश में शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक ड्यूटी न लेने की बात स्पष्ट की गई है। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के करीब 8 से 10 शिक्षक BLO और SIR जैसी ड्यूटी में लगे हुए हैं। परीक्षाओं के नजदीक होने के कारण शिक्षकों का कक्षा में रहना विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक कई दिनों तक बाहरी ड्यूटी पर रहते हैं तो पढ़ाई की निरंतरता प्रभावित होती है। इससे विद्यार्थियों की तैयारी और परीक्षा परिणाम पर भी असर पड़ सकता है। बायोलॉजी की लेक्चरर प्रतिभा मिश्रा और इंग्लिश लेक्चरर सादर शर्मा ने भी फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि शिक्षक की मुख्य जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना और उनका मार्गदर्शन करना है। सादर शर्मा ने बताया कि कई बार 80 से 90 प्रतिशत तक स्टाफ बाहरी ड्यूटी पर चला जाता है, जिससे स्कूल में पढ़ाई प्रभावित होती है। शिक्षकों ने कहा कि कक्षा में नियमित उपस्थिति से विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग भी मिल सकेगा।