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शिवपुरी: माधव टाइगर रिजर्व के मुआवजे के लिए भटक रहा किसान, जमीन शासकीय दर्ज होने से बढ़ी परेशानी

Tue, 13 Oct 2026 04:03 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी

शिवपुरी जिले में माधव टाइगर रिजर्व से जुड़े मुआवजे का मामला सामने आया है। ग्राम लखनगवां निवासी किसान हरी सिंह गुर्जर ने अपनी जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज किए जाने और मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में की। किसान ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि उसकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह अपने बच्चों सहित आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है।

हरी सिंह गुर्जर के मुताबिक, उनकी जमीन खसरा सर्वे नंबर-2 में दर्ज है और वह वर्तमान में भी उस पर काबिज है। किसान का आरोप है कि 6 मार्च 2023 को राजस्व विभाग और तहसीलदार द्वारा उनकी जमीन को शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया। उनका कहना है कि माधव टाइगर रिजर्व से संबंधित मामले में अब तक उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में जमीन के रिकॉर्ड में हुए बदलाव ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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किसान ने जनसुनवाई में बताया कि जमीन शासकीय दर्ज होने के कारण उन्हें कोटा सोसायटी सेवा सहकारी संस्था से खेती के लिए खाद नहीं मिल पा रही है। इससे कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। किसान का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी समस्या के कारण उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हरी सिंह गुर्जर का दावा है कि वह अपनी समस्या को लेकर जिला प्रशासन को कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायत का निराकरण नहीं हुआ। उन्होंने करीब 20 वर्षों से विभिन्न मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहने की बात भी कही है। किसान ने मांग की है कि मुआवजे से संबंधित प्रकरण का निराकरण होने तक उनकी जमीन को शासकीय रिकॉर्ड से हटाने की कार्रवाई की जाए, ताकि वह खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।

आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों का हवाला देते हुए किसान ने बच्चों सहित आत्महत्या की चेतावनी दी है। उन्होंने अपनी स्थिति के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है। अब किसान की शिकायत पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखना होगा। फिलहाल जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव और मुआवजे की पात्रता से जुड़े मामले में जांच तथा संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना बाकी है।

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