कांग्रेस से भाजपा में आए जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना किसानों के मुद्दों को लेकर अपनी ही पार्टी के संगठन के सामने सवाल खड़े कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। संगठन ने न्यूक्लियर पावर प्लांट, किसानों को चार गुना मुआवजा और रेत तस्करी में लगे ट्रैक्टरों पर कार्रवाई नहीं होने जैसे मुद्दों को लेकर किसानों को लामबंद करने पर आपत्ति जताई है। इसके बावजूद सक्सेना का गांव-गांव पहुंचकर किसानों से संपर्क करने का अभियान जारी है।
नोटिस जारी होने के अगले दिन रविवार को भी सक्सेना छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के नवेगांव, उमरिया, इसरा सहित अन्य गांवों में पहुंचे। उन्होंने किसानों के साथ बैठकें कीं और 13 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उनके इस अभियान की जानकारी सोशल मीडिया पर भी साझा की गई।
संगठन की आपत्ति के बीच अमित सक्सेना ने अपने कार्यक्रम को जनप्रतिनिधि के तौर पर किसानों की समस्याएं उठाने की पहल बताया। उन्होंने कहा कि किसान बस स्टैंड पर एकत्र होंगे और वहां से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे। यहां वे अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की समस्याओं को लेकर धरना दे सकते हैं, तो जिला पंचायत उपाध्यक्ष होने के नाते वे किसानों की मांगों को लेकर ज्ञापन क्यों नहीं सौंप सकते।
'जनप्रतिनिधि के नाते कर रहा हूं कार्यक्रम, भाजपा का इससे लेना-देना नहीं'
अमित सक्सेना ने कहा, "हम सभी किसान बस स्टैंड पर एकत्र होकर कलेक्ट्रेट तक पैदल जाएंगे और वहां ज्ञापन सौंपेंगे। यह कार्यक्रम जनप्रतिनिधि के नाते किया जा रहा है और इसमें भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। कल ही हमारे पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह जी ने अपने क्षेत्र में समस्या आने पर किसानों के साथ धरना दिया था। जब हमारे केंद्रीय मंत्री प्रदर्शन कर सकते हैं, तो मैं जिला पंचायत का उपाध्यक्ष होने के नाते ज्ञापन क्यों नहीं दे सकता? मेरा यही सवाल है।"
सक्सेना के इस बयान से स्पष्ट है कि वह अपने कार्यक्रम को पार्टी के राजनीतिक अभियान के बजाय किसानों की समस्याओं से जुड़ी जनप्रतिनिधि की पहल बता रहे हैं। हालांकि, भाजपा संगठन की ओर से उनकी गतिविधियों पर आपत्ति जताए जाने के बाद यह मामला पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया है।
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तीन मुद्दों पर किसानों को जोड़ने की तैयारी
भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में अमित सक्सेना की गतिविधियों पर सवाल उठाए गए हैं। नोटिस के मुताबिक, वह न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना, किसानों को चार गुना मुआवजा और रेत तस्करी में लगे ट्रैक्टरों पर कार्रवाई नहीं होने जैसे मुद्दों को लेकर किसानों के बीच जा रहे हैं। संगठन ने इन गतिविधियों को पार्टी विरोधी मानते हुए उनसे सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
दूसरी ओर, सक्सेना इन मुद्दों पर किसानों से लगातार संवाद कर रहे हैं। गांवों में बैठकें कर वह किसानों से प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसान बस स्टैंड से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च कर अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपेंगे।
नोटिस के बाद संगठन और सक्सेना के रुख पर नजर
अमित सक्सेना कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। अब किसानों के मुद्दों पर उनकी सक्रियता को लेकर भाजपा संगठन की आपत्ति ने जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज कर दी हैं। एक ओर संगठन ने उनसे जवाब मांगा है, वहीं दूसरी ओर सक्सेना अपने कार्यक्रम को जनप्रतिनिधि के दायित्व से जोड़कर आगे बढ़ रहे हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमित सक्सेना नोटिस का क्या जवाब देते हैं और भाजपा संगठन उनके स्पष्टीकरण पर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल, नोटिस के बावजूद जारी उनके किसान संपर्क अभियान से पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।