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Video: सरकारी प्रोत्साहन के बीच संकट में लखनऊ का रेवड़ी कारोबार, आखिर क्यों सिमट रही मिठास?

नवाबी तहजीब और ऐतिहासिक विरासत के साथ राजधानी की पहचान उसके पारंपरिक स्वाद से भी जुड़ी है। चारबाग स्टेशन के आसपास कभी रेवड़ी की मिठास और इसकी खुशबू राहगीरों को अपनी ओर खींचती थी। यहां तैयार होने वाली रेवड़ी सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि शहर की पुरानी खानपान संस्कृति का हिस्सा रही है। हालांकि बदलते दौर में लखनऊ का यह पारंपरिक कारोबार धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। सरकार की ओर से स्थानीय और पारंपरिक कारोबार को बढ़ावा देने की कोशिशों के बावजूद रेवड़ी बनाने वाले कारीगरों के सामने कई चुनौतियां हैं। बढ़ती लागत, बदलती पसंद और बाजार की प्रतिस्पर्धा के बीच कारोबार को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है। आखिर क्यों बंद हो रही हैं रेवड़ी की पुरानी भट्टियां और क्या चाहते हैं रेवड़ी बनाने वाले कारीगर? जानिए इस खास रिपोर्ट में।

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