झांसी। सुप्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू ने कहा कि मनुष्य को अपने आचार-विचार में सत्यता अपनानी चाहिए। सत्य के मार्ग पर चलना कठिन जरूर है, लेकिन इससे मिलने वाला आनंद अलग ही होता है। जीवन में प्रेम, करुणा और क्षमा का भाव बनाए रखना चाहिए। रामचरित मानस में जीवन की समस्याओं का समाधान मिलता है। शुक्रवार को शिल्प मेला मैदान में आयोजित एक दिवसीय श्रीरामकथा को उन्होंने वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य को समर्पित किया। मोरारी बापू भारत स्वस्तिक यात्रा लेकर दो विशेष ट्रेनों से ओंकारेश्वर से झांसी पहुंचे। इस यात्रा के माध्यम से वह सनातन हिंदू वैदिक संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दे रहे हैं। कथा का शुभारंभ हनुमान चालीसा और वंदेमातरम से हुआ। महारानी लक्ष्मीबाई को नमन करते हुए बापू ने कहा कि उनके शौर्य को कभी भुलाया नहीं जा सकता। बुंदेलखंड की धरती को पावन बताते हुए उन्होंने कहा कि चित्रकूट में प्रभु श्रीराम ने 12 वर्ष तक विचरण किया था। इस धरती को बार-बार नमन करने का मन करता है। सत्य, क्षमा और मधुर वाणी से संवरेगा जीवन मोरारी बापू ने कहा कि सत्य के साथ चलने वाला और दूसरों का शुभ करने वाला व्यक्ति ही दिव्य मार्ग पर चलता है। वाणी का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हमें ऐसे शब्द बोलने चाहिए, जिनसे आत्मा प्रसन्न हो। क्षमा करना भी सीखना चाहिए, क्योंकि क्षमा से बड़ा कोई आभूषण नहीं है। उन्होंने पूर्वजों के बताए मार्ग पर चलने और किसी के साथ छल-कपट नहीं करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज लोगों के दिलों में प्रेम और करुणा की जगह कपट व ईर्ष्या ने ले ली है। भाई-भाई, पति-पत्नी और पिता-पुत्र के रिश्तों में भी छल-कपट के कारण कलह बढ़ रही है। इसका निदान बताते हुए उन्होंने प्रतिदिन रामचरित मानस का पाठ करने की सलाह दी। कहा कि धार्मिक ग्रंथ मनुष्य को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करते हैं। रामकथा जीवन की नौका पार लगाने का माध्यम है। इसे पुष्पक विमान की तरह बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें जितने लोग सवार हों, उतने कम हैं। भरत जैसा भाई मिलना कठिन श्रीराम जन्म की कथा सुनाते हुए बापू ने कहा कि भगवान श्रीराम ने केवल दुष्टों के संहार के लिए ही जन्म नहीं लिया था, बल्कि अहिल्या के उद्धार जैसे कार्य भी उनके अवतार का उद्देश्य थे। उन्होंने राजा दशरथ और श्रवण कुमार के माता-पिता से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से कथा सुनाई। भरत के भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि भाई हो तो भरत जैसा, क्योंकि ऐसा भाई मिलना कठिन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है, लेकिन चतुराई छोड़कर भजन करने से बुरे कर्मों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता है। श्रीराम जैसी संतान की कामना करने वालों को पति-पत्नी के बीच मधुर संबंध बनाए रखने चाहिए। दोनों एक-दूसरे का सम्मान करें और मिलकर भगवान का भजन करें। श्रीराम जन्म पर झूमे श्रद्धालु कथा के दौरान भगवान श्रीराम का जन्म होते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। बधाई गीत गाए गए और लोगों ने नृत्य कर उत्सव मनाया। मोरारी बापू के श्रीराम संकीर्तन पर भी श्रद्धालु थिरकते नजर आए। उन्होंने मानस की चौपाइयां सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। इससे पहले सांसद अनुराग शर्मा और संतोष दास सतुआ महाराज ने मोरारी बापू का स्वागत किया। कार्यक्रम में गोपाल बाबा, रवि नीखरा, राजीव अग्रवाल, अनूप शर्मा, मनीष तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। अंत में राष्ट्रभक्त संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष अंचल अड़जरिया ने आभार व्यक्त किया। श्रद्धालुओं ने साझा किए यात्रा के अनुभव कन्याकुमारी से मोरारी बापू के साथ यात्रा कर रहीं झारखंड के धनबाद निवासी सेवानिवृत्त अध्यापिका जसमीना याज्ञनिक ने बताया कि वह 2014 से बापू से जुड़ी हैं। उनके साथ यात्रा करने और राम नाम जपने से मन प्रसन्न रहता है। मथुरा की मेघा सोनी ने बताया कि वह 20 साल से बापू से जुड़ी हैं और कन्याकुमारी से उनके साथ यात्रा कर रही हैं। उन्होंने केदारनाथ तक साथ रहने की बात कही। ग्रेटर नोएडा के दीप शर्मा ने भी बचपन से बापू से जुड़ाव बताते हुए यात्रा को आनंददायक बताया। मुंबई के हरदेव राठौर ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन धर्म के लिए समर्पित कर दिया है। आज मथुरा में होगी कथा मोरारी बापू ने 10 अक्तूबर को कन्याकुमारी से भारत स्वस्तिक यात्रा शुरू की थी। यात्रा का पहला चरण विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 23 अक्तूबर को केदारनाथ में संपन्न होगा। झांसी के बाद 17 अक्तूबर को मथुरा में कथा होगी। यात्रा में करीब एक हजार सेवादार और श्रद्धालु शामिल हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार, यात्रा का दूसरा चरण 14 से 22 नवंबर तक द्वारका से जगन्नाथ पुरी तक प्रस्तावित है। किले में रानी को किया नमन, गाया राष्ट्रगान शिल्प मेला मैदान में बने कथा मंडप में पहुंचने से पहले कथावाचक मोरारी बापू ने महारानी लक्ष्मीबाई के किले का भ्रमण किया। उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और बलिदान को नमन किया। किले में राष्ट्रीय ध्वज के समक्ष राष्ट्रगान भी गाया।