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कालीबाड़ी में विराजी मां दुर्गा, भक्तों ने की विश्व कल्याण की प्रार्थना

झांसी। शारदीय नवरात्र की षष्ठी पर शुक्रवार को कालीबाड़ी में बांधव समिति का 166वां श्री दुर्गा पूजा उत्सव शुरू हुआ। मां दुर्गा के बोधन, आमंत्रण और अधिवास पूजन के साथ उत्सव का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने मां की स्तुति कर विश्व कल्याण की कामना की। आरती के दौरान ढाक के मधुर स्वर गूंज उठे। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। महाषष्ठी पर सुबह शिव शंकर चटर्जी ने चंडी पाठ किया। पुरोहित दिलीप कुमार रॉय ने मां दुर्गा का बोधन, आमंत्रण और अधिवास पूजन कराया। आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। आदिश्री और मोहिनी बनर्जी ने नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद मौसमी और अभिसिक्ता रॉय ने शिव तांडव स्तोत्र पर नृत्य कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देवाशीष चटर्जी, बादल मुखर्जी, अरुणेश मोइत्रा, अरविंद अरोरा, दिनेश यादव, अविनाश दीक्षित और रविशंकर चटर्जी ने गीत प्रस्तुत किए। रामस्वरूप ने हारमोनियम और सौरभ द्विवेदी ने तबले पर संगत दी। समिति के अध्यक्ष प्रदीप मुखर्जी और सचिव जॉय चटर्जी ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अजीत रॉय, प्रदीप तरफदार, सिद्धार्थ चटर्जी, प्रभात तरफदार सहित अन्य लोग मौजूद रहे। पंडाल में जल संरक्षण की थीम कालीबाड़ी में दुर्गा पूजा उत्सव के माध्यम से हर साल सामाजिक संदेश दिया जाता है। इस बार पंडाल को जल संरक्षण की थीम पर सजाया गया है। इसके जरिए श्रद्धालुओं को पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कालीबाड़ी का दुर्गा पूजा उत्सव सामाजिक सद्भाव की मिसाल भी है। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण दशकों से मुस्लिम कारीगर करते आ रहे हैं। प्रतिमा का निर्माण आयोजन स्थल पर ही किया जाता है और विसर्जन भी वहीं बने कुंड में होता है। उत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। फिल्म अभिनेत्री रानी मुखर्जी के परिवार का भी कालीबाड़ी से विशेष जुड़ाव रहा है। उनका परिवार कालीबाड़ी के पास ही रहता था और उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। समिति के सांस्कृतिक सचिव रविशंकर चटर्जी के अनुसार, शनिवार को महासप्तमी पर पूजा, पुष्पांजलि, संध्या आरती और बांग्ला सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। आरती में धुनूची नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।

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