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जॉन एलिया : ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं

काव्य डेस्क, नई दिल्ली Updated Thu, 05 Oct 2017 10:03 AM IST

जॉन की शायरी में उनकी छलकती हुई संवेदनाएं हैं, वो जो भी हैं, जैसे भी हैं अपने जैसे हैं। 14 दिसंबर 1931 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक संभ्रांत परिवार में जॉन ने जन्म लिया। जॉन बड़े सुसंस्कृत और पढ़े-लिखे व्यक्ति थे। उनके बारे में कहा जाता है कि 8 साल की उम्र में उन्होंने पहली शायरी कही। जॉन साहब के पिता का नाम अल्लामा शफीक हसन एलिया था, जो जाने-माने विद्वान और शायर। उनके बड़े भाई रईस अमरोही भी जाने-माने पत्रकार और शायर थे।

आप यह समझ सकते हैं कि शायरी तो जॉन के खून में थी। जॉन बचपन से बहुत संवेदनशील थे, बंटवारे के बाद उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ा। हालाँकि जॉन अपनी जन्मभूमि को छोड़ना नहीं चाहते थे। लेकिन बंटवारे के बाद वे अपनी चाहतों के साथ नहीं रह सके, उन्हें जाना ही पड़ा।

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