इरशाद

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                                                                           दीप के जलने से, उजाला है।
आग पर तप रहा,निवाला है

अगन लगाकर, वह चला गया  
रोटी कोई,और सेकने वाला है।

बढ़ गए फ़ासले दरो-दीवार के
मकां आजकल ढहने वाला है।

भूल-भुलैया में,भटक गए लोग
भा...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           चांद क्यूं अब्र की उस मैली सी गठरी में छुपा था
उस के छुपते ही अंधेरों के निकल आए थे नाख़ुन
और जंगल से गुज़रते हुए मासूम मुसाफ़िर
अपने चेहरों को खरोंचों से बचाने के लिए चीख़ पड़े थे

चांद क्यूं अब्र की उस मैली सी गठर...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे 
तू ने आँखों से कोई बात कही हो जैसे 

जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे 
जान बाक़ी है मगर साँस रुकी हो जैसे 

हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है 
मुझ से कुछ तेरी नज़र प...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया 
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया 

अहद-ए-जवानी रो रो काटा पीरी में लीं आँखें मूँद 
या'नी रात बहुत थे जागे सुब्ह हुई आराम किया 

हर्फ़ नहीं जाँ-बख़...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           विश्वास करना चाहता हूँ कि
जब प्रेम में अपनी पराजय पर
कविता के निपट एकांत में विलाप करता हूँ
तो किसी वृक्ष पर नए उगे किसलयों में सिहरन होती है
बुरा लगता है किसी चिड़िया को दृश्य का फिर भी इतना हरा-भरा होना
किसी नक्षत...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           दोस्ती का चलन रहा ही नहीं 
अब ज़माने की वो हवा ही नहीं 

सच तो ये है सनम-कदे वालो 
दिल ख़ुदा ने तुम्हें दिया ही नहीं 

पलट आने से हो गया साबित 
नामा-बर तू वहाँ गया ही नहीं 

हाल ये है कि...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा 
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा 

हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा 
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा 

वो हवाओं की तरह ख़ाना-ब-जाँ फिरता है 
एक झोंका ह...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           सर्दी के दिनों में जो प्रेम शुरू हुआ 
वह बहुत सारे कपड़े पहने हुए था 
उसे बार-बार बर्फ़ में रास्ता बनाना पड़ता था 
और आग उसे अपनी ओर खींचती रहती थी 
जब बर्फ़ पिघलना शुरू हुई तो वह पानी की तरह 
हल्की चमक लिए हुए कुछ...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           दूर-दूर तक
सोई पड़ी थीं पहाड़ियाँ
अचानक टीले करवट बदलने लगे
जैसे नींद में उठ चलने लगे ।

एक अदृश्य विराट हाथ बादलों-सा बढ़ा
पत्थरों को निचोड़ने लगा
निर्झर फूट पड़े
फिर घूमकर सब कुछ रेगिस्तान में...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           चले तो कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता आहिस्ता 
हम उस के पास जाते हैं मगर आहिस्ता आहिस्ता 

अभी तारों से खेलो चाँद की किरनों से इठलाओ 
मिलेगी उस के चेहरे की सहर आहिस्ता आहिस्ता 

दरीचों को तो देखो चिलमनों के राज़ तो...और पढ़ें
6 days ago
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