भारत सरकार अब पेट्रोल में E20 से अधिक इथेनॉल मिश्रण की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के जरिए ई20 से आगे इथेनॉल मिश्रण की अनुमति देने पर काम कर रही है। उन्होंने यह यह अहम जानकारी 'द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026' के चौथे संस्करण को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कही। कपूर के मुताबिक, देश में ई20 कार्यक्रम अब तक काफी सफल रहा है। और कई वाहन निर्माता जल्द ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेश करने की योजना की घोषणा कर चुके हैं। कपूर ने E20 कार्यक्रम को अब तक “बहुत सफल” बताया। उन्होंने कहा कि कई ऑटोमोबाइल कंपनियां जल्द ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बाजार में लाने की योजनाएं घोषित कर चुकी हैं।
भारत सरकार पेट्रोल में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के बाद अब इससे आगे बढ़ने की संभावनाओं पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने 9 सितंबर 2026 को आयोजित द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026 के चौथे संस्करण को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के जरिए E20 से आगे इथेनॉल ब्लेंडिंग का रास्ता तैयार कर रही है। कपूर ने मौजूदा E20 कार्यक्रम को अब तक काफी सफल बताया और कहा कि कई ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बाजार में लाने की योजनाओं की घोषणा कर चुकी हैं।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन इस पूरी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा होंगे। सामान्य पेट्रोल वाहनों की तुलना में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। यही वजह है कि सरकार E20 से आगे बढ़ने के लिए पहले ऐसे वाहनों का इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मौजूदा वाहनों में E20 से ऊपर इथेनॉल मिश्रण को व्यापक रूप से लागू करने के बजाय ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन का विकल्प मुख्य रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए रखा जा सकता है।
इस नीति के पीछे सिर्फ पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना भी बड़ा उद्देश्य है। भारत दुनिया के प्रमुख कच्चा तेल आयातकों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों या आपूर्ति में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। हालिया वैश्विक तेल आपूर्ति संकट के बीच सरकार घरेलू स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों और जैव ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रही है।
इथेनॉल उत्पादन के लिए भारत मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और चावल जैसे कृषि स्रोतों का इस्तेमाल करता है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल का बढ़ता उपयोग किसानों, चीनी उद्योग और बायो-एनर्जी सेक्टर के लिए नए बाजार तैयार कर सकता है। साथ ही, पेट्रोल में अधिक मात्रा में घरेलू रूप से उत्पादित इथेनॉल शामिल होने से पेट्रोलियम आयात की जरूरत को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, E20 से आगे जाने की राह में तकनीकी और आर्थिक चुनौतियां भी हैं। ज्यादा इथेनॉल मिश्रण के कारण वाहन की ईंधन दक्षता, इंजन के प्रदर्शन और ईंधन प्रणाली से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
सरकार इसलिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की रणनीति अपना रही है। पहले E20 को व्यापक स्तर पर लागू करना, फिर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की उपलब्धता बढ़ाना और उसके बाद ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के विकल्प को विस्तार देना इस दिशा में संभावित रोडमैप माना जा रहा है। अगर ऑटो कंपनियां बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल बाजार में लाती हैं और जरूरी ईंधन ढांचा विकसित होता है, तो भारत के लिए E20 के बाद का अगला चरण खोलना आसान हो सकता है। इस तरह इथेनॉल ब्लेंडिंग सिर्फ पेट्रोल में मिश्रण बढ़ाने की नीति नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, कृषि अर्थव्यवस्था और वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी रणनीति बन सकती है।