शहर के नरसिंह मंदिर के सामने वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे विशाल और प्राचीन पीपल के पेड़ की आखिरकार नगर परिषद ने सुध ले ली है। पेड़ के आसपास लंबे समय से जमा गंदगी को हटाकर सफाई करवाई गई और इसके रखरखाव की व्यवस्था की गई है। इसी कड़ी में मंगलवार को प्राचीन पीपल के पास धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस दौरान विधिवत पूजा-अर्चना और हवन किया गया। इसके बाद यहां बजरंगबली और शनिदेव की स्थापना की गई। पीपल के वृक्ष की पूजा पुजारी पं. राजेश कुमार और पंडित रूपेश गौतम ने विधिवत तरीके से करवाई। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण की पहल पीपल के संरक्षण की इस पहल का विश्व हिंदू परिषद ने स्वागत किया है। विहिप ने कहा कि सनातन परंपरा में पीपल के वृक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। संगठन के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में पीपल के मूल में ब्रह्मा, तने में विष्णु, शाखाओं में रुद्र और पत्तों में देवताओं के वास की मान्यता है। वहीं, पर्यावरण की दृष्टि से भी पीपल को महत्वपूर्ण वृक्ष माना जाता है। ऐसे में वर्षों पुराने इस पेड़ के आसपास सफाई और रखरखाव की व्यवस्था किए जाने को स्थानीय स्तर पर संरक्षण की दिशा में पहल के तौर पर देखा जा रहा है। विहिप जिला रामपुर ने नगर परिषद अध्यक्ष करण शर्मा की पहल की सराहना की। संगठन ने कहा कि लंबे समय से गंदगी से घिरे इस प्राचीन वृक्ष और उसके आसपास के क्षेत्र की सफाई जरूरी थी। विहिप की ओर से नगर परिषद अध्यक्ष का अभिनंदन भी किया गया। संगठन ने उम्मीद जताई कि रामपुर शहर में मौजूद अन्य प्राकृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भी इसी तरह के प्रयास आगे जारी रहेंगे। संगठन ने रामपुर के लोगों से भी अपने आसपास मौजूद प्राचीन वृक्षों और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है। इस अवसर पर सत्यनारायण मंदिर न्यास रामपुर के सचिव विनय शर्मा, विष्णु शर्मा, कार्तिक शुक्ला, श्याम लाल लिहांटू सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।