मनरेगा में दिहाड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाली कांगर गांव की हिमा देवी के लिए बेटे की शादी के लिए मिली 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता बड़ी राहत बनी। सीमित आमदनी के बीच विवाह का खर्च उठाना परिवार के लिए चुनौती था, लेकिन हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की योजना के तहत मिली सहायता से आर्थिक बोझ कम हुआ। हिमा देवी को 15 अगस्त 2026 को अपने छोटे बेटे की शादी के लिए 51 हजार रुपये की सहायता मिली। उन्होंने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए कहा कि जरूरत के समय मिलने वाली ऐसी आर्थिक मदद श्रमिक परिवारों के लिए काफी उपयोगी साबित होती है। वर्ष 2022 से 31 अगस्त 2026 तक सुंदरनगर उपमंडल में कुल 2,880 श्रमिक पंजीकृत हुए हैं। इस अवधि में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 553 श्रमिकों को करीब 2.16 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। वहीं, एक अप्रैल से 31 अगस्त 2026 तक पांच माह के दौरान ही श्रमिकों को 60.66 लाख रुपये की सहायता दी गई। इन योजनाओं का उद्देश्य श्रमिक परिवारों को विवाह, मातृत्व-पितृत्व, चिकित्सा और अन्य जरूरतों के समय आर्थिक सहारा देना है। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों को दी गई सहायता का विवरण इस प्रकार है: विवाह सहायता: 100 लाभार्थियों को 51 लाख रुपये। मातृत्व-पितृत्व सहायता: 21 लाभार्थियों को 7.03 लाख रुपये। मृत्यु सहायता: एक लाभार्थी को 2.20 लाख रुपये। छात्रावास सहायता: दो लाभार्थियों को 40 हजार रुपये। चिकित्सा सहायता: एक लाभार्थी को 3,379 रुपये। इन योजनाओं के माध्यम से पात्र श्रमिकों और उनके परिवारों को अलग-अलग जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। जिला श्रम कल्याण अधिकारी अनिल ठाकुर ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों से ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण करवाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 16 से 59 वर्ष की आयु के पात्र श्रमिक आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाते के विवरण के साथ पंजीकरण करवा सकते हैं। श्रमिक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, पंजीकरण के लिए नजदीकी साझा सेवा केंद्र की सहायता भी ली जा सकती है। पात्र श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपनी जानकारी सही और अद्यतन रखने की सलाह दी गई है।