भाजपा मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस नेताओं के बयानों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में वोट चोरी जैसी कोई स्थिति होती तो आज हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं होती। राकेश जम्वाल ने कहा कि वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव चुनाव आयोग की निगरानी में हुआ था। इसी चुनाव में मिले जनादेश के आधार पर कांग्रेस सत्ता में आई और सुखविंद्र सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री बने। ऐसे में अब उसी चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना कांग्रेस के दोहरे राजनीतिक रवैये को दर्शाता है। राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला और 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि अलग-अलग समय पर सामने आई उसकी राजनीतिक असफलताओं और चुनावी परिणामों के लिए ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं या फिर कांग्रेस की अपनी कमजोर रणनीति, संगठन और नेतृत्व? भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास अपनी राजनीतिक विफलताओं का जवाब नहीं है। इसलिए वह चुनाव आयोग को निशाना बनाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में परिणाम अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकार करना और प्रतिकूल परिणाम आने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति गंभीरता नहीं है। चुनाव आयोग कोई राजनीतिक दल नहीं राकेश जम्वाल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के सार्वजनिक बयान को लेकर भी कांग्रेस के नेता सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि चुनाव आयोग कोई राजनीतिक दल नहीं है, जिसे प्रत्येक राजनीतिक आरोप का जवाब देना पड़े। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और उसका दायित्व चुनाव प्रक्रिया का संचालन करना है। यदि कांग्रेस को किसी चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति है तो उसे तथ्यों और निर्धारित संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए। राकेश जम्वाल ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि “वोट चोरी” होती तो वर्ष 2022 में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता कैसे मिलती? उन्होंने पूछा कि क्या उस समय चुनाव आयोग सही था और अब गलत हो गया? क्या जनता का वोट तब पवित्र था और अब कांग्रेस के खिलाफ जाने पर संदिग्ध हो गया? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश को सुविधा के हिसाब से स्वीकार नहीं किया जा सकता। राकेश जम्वाल ने कांग्रेस को चुनाव आयोग के बजाय अपनी सरकार और संगठन के प्रदर्शन पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता महंगाई, शुल्क वृद्धि, विकास कार्यों और सरकार के कामकाज को लेकर सवाल पूछ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सवालों का जवाब देने के बजाय चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करना जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने का प्रयास है। जम्वाल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भी सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग पर सवाल उठाना कांग्रेस का अधिकार है तो क्या वर्ष 2022 में इसी व्यवस्था से मिला कांग्रेस का जनादेश भी सवालों के घेरे में था? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है। चुनाव जीतने पर संस्थाओं को स्वीकार करना और राजनीतिक नुकसान होने पर उन्हीं संस्थाओं पर आरोप लगाना राजनीतिक जिम्मेदारी से बचने का रास्ता नहीं हो सकता।