शादी का भरोसा देकर रिश्ते में नजदीकी बढ़ी, लेकिन अब वही मामला पुलिस जांच तक पहुंच गया है। मंडी में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और ठगी के आरोपों में नामजद मुजफ्फरनगर निवासी समीर की तलाश पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परेशान पीड़िता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडी पुलिस ने एसआईटी गठित की है। एसआईटी आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी का मोबाइल फोन चालू है और वह सोशल मीडिया पर सक्रिय है। सोमवार को मीडिया से बातचीत में उसने दावा किया कि 22 सितंबर के बाद भी आरोपी मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा है और सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी आरोपी से बातचीत हुई है। पीड़िता का कहना है कि जब आरोपी मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है तो पुलिस उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं कर पा रही, यह सवाल खड़ा होता है। हालांकि आरोपी के मोबाइल की स्थिति, उसकी वास्तविक लोकेशन और सोशल मीडिया गतिविधि से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही इन पहलुओं की स्थिति स्पष्ट होगी। पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी समीर जनवरी में सोशल मीडिया के माध्यम से उसके संपर्क में आया था। बातचीत आगे बढ़ी और आरोपी ने उससे शादी करने का भरोसा दिया। पीड़िता के अनुसार इसी दौरान आरोपी ने मंडी और चंडीगढ़ में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उससे 70 हजार रुपये, कीमती मोबाइल, सोने की बालियां और अन्य आभूषण भी लिए। पीड़िता का कहना है कि आरोपी उसे अपने परिजनों से मिलाने के लिए भी ले गया था। इसके बाद वह लगातार आरोपी और उसके परिवार से शादी की बात करती रही, लेकिन आरोप है कि हर बार किसी न किसी बहाने से शादी की बात टाल दी गई। आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंचा और अब इसकी जांच एसआईटी कर रही है। एसपी मंडी विनोद कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि आरोपी की तलाश की जा रही है और मामले में नियमानुसार जांच जारी है। पुलिस की टीमें आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। अब पुलिस जांच के साथ-साथ आरोपी की गिरफ्तारी पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल मामले में पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है। आरोपी पक्ष का बयान सामने नहीं आया है, इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।