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मंडी के 30 गांवों में घर-घर पहुंचेगी टीम, 3 से 16 साल के बच्चों की पढ़ाई का होगा आकलन

जिले के 30 चयनित गांवों में अब बच्चों की पढ़ाई की वास्तविक स्थिति जानने के लिए घर-घर सर्वे किया जाएगा। 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सर्वे में 3 से 16 वर्ष तक के बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसमें यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कितने बच्चे स्कूल या अन्य संस्थानों में नामांकित हैं और वे पढ़ाई के निर्धारित बुनियादी स्तर तक पहुंच पाए हैं या नहीं। सर्वे का मुख्य उद्देश्य गांवों में बच्चों की शिक्षा की जमीनी तस्वीर सामने लाना है। इसके लिए अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों की जरूरत के अनुसार उनकी शैक्षणिक क्षमताओं की जांच की जाएगी। सर्वे में 3 से 4 वर्ष के बच्चों की आंगनबाड़ी अथवा अन्य संस्थानों में नामांकन स्थिति देखी जाएगी। इसके साथ यह भी समझने का प्रयास किया जाएगा कि इस आयु वर्ग के बच्चे प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था से कितने जुड़े हुए हैं। वहीं, 5 से 13 वर्ष तक के बच्चों की बुनियादी पढ़ने और गणित की दक्षता परखी जाएगी। बच्चों से उनकी कक्षा के अनुरूप सवाल और गतिविधियां करवाई जाएंगी, ताकि उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता का आकलन किया जा सके। इसके अलावा 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए सर्वे का दायरा और व्यापक होगा। इस आयु वर्ग में पढ़ने-लिखने और गणित की क्षमता के साथ-साथ डिजिटल टास्क करने की दक्षता भी जांची जाएगी। सर्वे के लिए डीएलएड के करीब 60 प्रशिक्षुओं का चयन किया गया है। ये प्रशिक्षु चयनित गांवों में जाकर घर-घर बच्चों से संपर्क करेंगे। बच्चों से सीधे बातचीत करने के साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनकी शैक्षणिक दक्षता का आकलन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से यह जानकारी सामने आ सकेगी कि गांवों में कितने बच्चे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हैं और कितने बच्चे पढ़ाई के बुनियादी स्तर तक पहुंच पाए हैं। सर्वे के आंकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा की स्थिति को समझने में मदद करेंगे। सर्वे के लिए चयनित डीएलएड प्रशिक्षुओं को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), मंडी में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सर्वे की प्रक्रिया, बच्चों से बातचीत करने और विभिन्न गतिविधियों के जरिए उनकी शैक्षणिक क्षमता का आकलन करने की जानकारी दी गई। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के जिला समन्वयक विजय जम्वाल ने बताया कि सर्वे से मंडी जिले की शैक्षणिक स्थिति को समझने में मदद मिलेगी। साथ ही इसके आंकड़ों के आधार पर प्रदेश और देश की शैक्षणिक स्थिति से तुलना करना भी संभव होगा। उन्होंने बताया कि सर्वे में शामिल टीमों के गांवों तक आने-जाने का किराया भी उपलब्ध करवाया जाएगा। यह सर्वे ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की तस्वीर सामने ला सकता है। खासतौर पर नामांकन, बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणित की क्षमता के साथ किशोर बच्चों की डिजिटल दक्षता से जुड़ा डेटा भविष्य की शैक्षणिक योजनाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

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