कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देव परंपरा निभाने के लिए देवता अनंत शेषनाग चोतरू शोधा आनी 1824 से पहुंच रहे हैं। देवता के कारदार परिवार से संबंध रखने वाले गौरव कटोच ने बताया कि देवता उत्सव में आने की परंपरा इतने लंबे समय से निभा रहा है। इस बार भी देव परंपरा निभाने के लिए 150 किलोमीटर पैदल चलकर हारियानों ने शेषनाग को कुल्लू पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि देवता को कष्ट हरने के लिए माना जाता है और मान्यता यह भी है कि संतान प्रप्ति के लिए भी देवता की पूजा अचर्ना की जाती है। फिलहाल, दशहरा उत्सव से देवता का सदियों पुराना नाता है और हारियान इस परंपरा का निर्वाहन कर रहे हैं।