कथित फर्जी ऋण आवंटन और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच के दायरे में चल रही कृषि सहकारी सभा संगरोह में अब मिच्योरिटी के बाद भी एफडी-आरडी की राशि का भुगतान नहीं होने का मामला सामने आया है। मंगलवार को पांच शेयरधारक सहायक पंजीयक, सहकारिता विभाग के कार्यालय पहुंचे और अपनी जमा राशि वापस नहीं मिलने की शिकायत दी। शेयरधारकों का कहना है कि सभा में उनकी बड़ी राशि एफडी और आरडी के रूप में जमा है। संबंधित जमा की मियाद पूरी होने के बाद भी उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसी समस्या को लेकर उन्होंने विभाग के समक्ष अपनी शिकायत रखी और मामले में कार्रवाई की मांग की। सहायक पंजीयक रवि कुमार के अनुसार कुछ शेयरधारक मंगलवार को कार्यालय पहुंचे थे और उन्होंने पैसा वापस नहीं मिलने की शिकायत दी है। विभाग की ओर से इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में उन्हें जानकारी दी गई है। संगरोह सभा की प्रबंधन कमेटी को लेकर भी स्थिति में बदलाव आया है। सात सदस्यीय कमेटी के दो सदस्यों ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। इससे अब कमेटी में चार सदस्य हो गए हैं। सहकारिता विभाग के अनुसार चार सदस्यों के होने पर कमेटी प्रधान और उपप्रधान का चुनाव करवाने में सक्षम है। इसी वजह से फिलहाल सभा में प्रशासक नियुक्त करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इससे पहले कमेटी ने सामूहिक इस्तीफा देते हुए विभाग पर सभा का ऑडिट नहीं करवाने समेत कई आरोप लगाए थे। सहकारिता विभाग ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है। विभाग का कहना है कि कमेटी को समय-समय पर ऑडिट करवाने और जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए थे। संगरोह सभा में कथित फर्जी ऋण आवंटन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच पहले से चल रही है। सहकारिता विभाग धारा 69(2) के तहत मामले की जांच कर रहा है। विभागीय जांच में 10 बिंदुओं पर खामियां सामने आने की बात कही गई है। जांच अधिकारी ने 18 मार्च 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद कमेटी को पूर्व सचिव के खिलाफ कार्रवाई करने और कथित गबन व धोखाधड़ी के पहलुओं की पुलिस जांच के लिए शिकायत करने के निर्देश दिए गए थे। मामले की जांच पिछले करीब डेढ़ से दो साल से चल रही है। तत्कालीन सहायक पंजीयक वीना धीमान के सेवानिवृत्त होने के बाद अब सहायक पंजीयक रवि कुमार इस मामले को देख रहे हैं। वहीं, मामले में विजिलेंस की जांच भी चल रही है। भोरंज थाना में एक निवेशक की शिकायत पर मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा चेक बाउंस से जुड़े मामले अदालत और उपभोक्ता अदालत तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में एक ओर सभा की वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी है, तो दूसरी ओर मिच्योरिटी के बाद जमा राशि नहीं मिलने की शिकायतों ने शेयरधारकों की चिंता बढ़ा दी है। अब विभाग की कार्रवाई और जांच के अगले चरण पर सभी की नजर है।