बिलासपुर सदर से विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रदेश सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार का ‘व्यवस्था परिवर्तन’ अभियान अब ‘व्यवस्था पतन’ में बदल गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा फैसलों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है और इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। सोमवार को बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में जमवाल ने कहा कि सरकार ने पहले विभिन्न स्तर के स्कूलों, आईटीआई और कॉलेजों को बंद करने के निर्णय लिए और अब वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों तथा कॉलेजों में विज्ञान और वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समाप्त किया जा रहा है। उनका आरोप है कि पहले विषय बंद कर विद्यार्थियों की संख्या घटाई जाएगी और बाद में इन संस्थानों को बंद करने का आधार तैयार किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बिलासपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के छह वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान और वाणिज्य संकाय बंद कर दिए गए हैं, जबकि 28 प्राथमिक और मिडल स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा सबसे अधिक प्रभावित होगी। त्रिलोक जमवाल ने प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेजी माध्यम लागू करने और सीबीएसई पाठ्यक्रम अपनाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से पहले शिक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया और न ही चरणबद्ध तैयारी की गई। एक ही विद्यालय में हिमाचल बोर्ड और सीबीएसई के अलग-अलग पाठ्यक्रम चलने से विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने जुखाला कॉलेज में विज्ञान और वाणिज्य संकाय बंद किए जाने के विरोध का भी उल्लेख किया और कहा कि स्थानीय लोग इस फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बिलासपुर पीजी कॉलेज की कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए कहा कि कभी प्रदेश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में शामिल यह कॉलेज अब ग्रेडिंग में पिछड़ता जा रहा है।