शीतकालीन अवकाश में विद्यार्थियों को गृ़ह कार्य देने के लिए शनिवार को बालवाटिका-3 से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए संवाद (पीटीएम) कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचे। जहां उनका स्वागत किया गया। अध्यापकों ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई के साथ ही संस्कारवान बनाने के लिए इस बार गृह कार्य में बदलाव किया है। विद्यार्थियों को लिखने या रटने की प्रवृति का नहीं, अनुभव आधारित गृह कार्य दिया जाएगा। अध्यापकों ने बताया कि स्कूलों में 1 से 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। इसमें दिए जाने वाले गृह कार्य में विद्यार्थी के साथ परिवार की भूमिका अहम होगी। जिसमें नाना-नानी, दादा-दादी व घर के वरिष्ठ सदस्य मेंटर की भूमिका अदा करते हुए अपने अनुभव के आधार पर नई पीढ़ी को संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल व्यवहार कुशलता प्रदान करेंगे। यह गतिविधियां विद्यार्थियों को पढऩे-लिखने, गणना कौशल देने के साथ आंकलन लगाना, एकीकरण, कहानी कहना, प्रस्ताव बनाना, देखना व समझना भी सिखाएंगी। अध्यापकों ने पीटीएम में पहुंचे अभिभावकों के साथ चर्चा कर गृह कार्य में किए बदलाव व इसके उद्देश्यों से अवगत कराया। विद्यार्थी के समग्र प्रदर्शन पर भी चर्चा की गई। अपनी पीढियों की जानकारी हासिल करेंगे विद्यार्थी शिक्षा विभाग की तरफ से तैयार गृहकार्य में विद्यार्थियों को अपनी पीढि़यों, उनकी परंपरा, खान-पान से संबंधित जानकारी प्राप्त करनी होगी। गृह कार्य ऐसे तैयार किया है, जिसमें विद्यार्थी मोबाइल व टेलीविजन से दूरी बनाए रखे व व्यस्त रह सके। इस बात का ध्यान रखा गया है कि गृह कार्य परिवार के बड़े सदस्यों के बिना पूरा होना संभव न हो। सभी गतिविधियां सर्द मौसम व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं। अभिभावकों को सौंपी यह जिम्मदारी शाम 8:00 बजे तक टीवी बंद कर दें, स्कूल डायरी देखने के लिए 30 से 45 मिनट निकालें व गृह कार्य पूरा करवाएं। रोज सभी विषयों में उनका प्रदर्शन देखें। उन विषयों का खास ध्यान रखें, जिसमें वह कमजोर है। सुबह जल्दी उठने की आदत डालें व ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दें। सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में बच्चों को शामिल करवायें, यह सीखने के शानदार अनुभव उपलब्ध करवाते हैं। बच्चे में पौधे लगाने व उनका ख्याल रखने की आदत का विकास करें। सोने के समय बच्चों को पंचतंत्र, तेनालीराम की शिक्षाप्रद कहानी और साहित्यिक, जातक, धार्मिक कथायें भी सुनाएं। बच्चे की प्रतिभा का पता लगाकर उसे निखारने में सहायता करें। इसकी जानकारी कक्षा अध्यापक को अवश्य दें। पर्यावरण संरक्षण के लिए कचरा प्रबंधन के महत्व का ज्ञान दें। हर रविवार खाने की ऐसी चीज बनाएं जो बच्चों को पसंद हों, इसमें उन्हें मदद करने को कहें। बच्चों के पूछे सवाल का जवाब दें, जानकारी न होने पर कक्षा अध्यापक की सहायता लें। अनुशासन और जीने के बेहतर तरीके बताएं और सही व गलत का अंतर समझाएं। बच्चों में स्वयं पढ़ने व सीखने की आदत डालें। आप भी उनकी पाठ्यपुस्तकें पढ़े। बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देें, ताकि वह जीवन में सफल और अच्छे इंसान बन सकें। शीतकालीन अवकाश में दिए जाने वाले गृह कार्य के संबंध में स्कूलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें अभिभावकों को विद्यार्थियों को दिए जाने वाले गृह कार्य व उसके उद्देश्यों के बारे में बताया गया। विद्यार्थियों के चहुंमुखी विकास के लिए अभिभावकों की भूमिका भी बताई गई। -रचना बाना, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत