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मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस का नारनौल में एक दिवसीय उपवास एवं सांकेतिक धरना

नवीन दलाल Updated Sun, 11 Jan 2026 03:38 PM IST

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के मूल स्वरूप में बदलाव की कोशिशों को लेकर कांग्रेस पार्टी आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। इसी कड़ी में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत रविवार को नारनौल में बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने एक दिवसीय उपवास एवं सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सतबीर झुकिया ने कहा कि मनरेगा 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया एक अधिकार आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से ग्रामीण भारत की जीवन रेखा रही है , कोविड महामारी के कठिन दौर में मनरेगा ने 4 करोड़ से अधिक परिवारों को रोजगार उपलब्ध करवाया जिसने ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य किया। विधायक मंजू चौधरी ने कहा कि प्रति वर्ष मनरेगा के तहत पांच करोड़ से अधिक परिवारों को रोजगार मिलता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर होने वाले पलायन में कमी आती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ना केवल रोजगार उपलब्ध कराना है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना का काम भी करती है। युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण राव ने बताया कि मनरेगा बचाओ संग्राम राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया है जिसके माध्यम से कांग्रेस का हर कार्यकर्ता जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य करेगी। महिला जिला अध्यक्ष डॉ. राज सुनेश ने कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा को खत्म करना चाहती है। पहले मनरेगा का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी लेकिन अब केवल 60 प्रतिशत केंद्र सरकार देगी। जिससे सीधा राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और जो सरकार पहले से भारी कर्ज में डूबी है और एसी स्थिति में वे इस योजना का भुगतान करने में असमर्थ होगी जिससे मनरेगा समाप्त हो जाएगा। इस अवसर महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस , एनएसयूआई, सेवा दल, ओबीसी, एससी सहित अन्य पदाधिकारी ने अपना विरोध दर्ज कराया।

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