भगड़ाना गांव की शर्मिला देवी महज 23 वर्ष की थीं, जब उनके पति आनंद कुमार कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। पति की मौत के बाद दो बेटियों जोनी, सुमित और बेटे अरुण के लालन-पालन की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आ गई थी। शर्मिला ने इन जिम्मेदारियों को न सिर्फ बखूबी निभाया, बल्कि पति की शहादत के 24 साल बाद अपने इकलौते बेटे को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनाकर सैनिक पति को सच्ची श्रद्धांजलि दी है।शर्मिला देवी बताती हैं सेना में सिपाही पति आनंद कुमार कारगिल युद्ध में ऑपरेशन रक्षक के दौरान 14 अगस्त 1999 को शहीद हो गए थे। उस वक्त उनकी उम्र महज 23 वर्ष थी। बड़ी बेटी जोनी 6 साल, दूसरी बेटी सुमित 4 साल और छोटा बेटा अरुण महज 13 माह का था। पति आनंद के बलिदान का समाचार मिला तो लगा मानो दुनिया उजड़ गई है। फिर अपने मासूम बच्चों का चेहरा देखा तो उनके लिए जीने की ठानी। शर्मिला बताती हैं परिवार पालने के लिए उन्होंने खुद खेती बाड़ी और पशुपालन की बागडोर थामी। मन में तय किया कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है और पति का नाम रोशन करना है। बेटा अरुण बना लेफ्टिनेंट शर्मिला ने बताया कि उनका इकलौता बेटा अरुण बीटेक करने के बाद एसएसबी की परीक्षा पास कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन चुका है। वहीं, बड़ी बेटी जोनी बीएड, एमएससी, सीटेट और रीट की परीक्षा पास कर शिक्षक बनने की तैयारी कर रही है। छोटी बेटी सुमित भी एमएससी नर्सिंग कर नर्सिंग से ही पीएचडी कर रही है।