सब्जी की खेती करने वाले किसानों को इन दिनों भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। सब्जी मंडियों में उचित भाव नहीं मिलने और खरीद कम होने से किसानों की सब्जियां खेतों में बनी झोपड़ियों में ही भीषण गर्मी के बीच सूखकर खराब हो रही हैं। किसानों का कहना है कि मेहनत और लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। गांव जैलाफ की सीम साण्डाला के खेतों में बटाई पर सब्जी की खेती कर रहीं बुद्धि देवी ने बताया कि उनका परिवार नारनौल से आकर खेतों में रहकर खेती कर रहा है। परिवार के करीब 10 सदस्य दिन-रात मेहनत कर घीया, भिंडी, काकड़ी, ग्वार फली और बैंगन जैसी सब्जियां उगा रहे हैं। इसके बावजूद मंडी में सब्जियों के दाम नहीं मिलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान कैलाश ने बताया कि बीज, कीटनाशक दवाइयों और सिंचाई पर काफी खर्च आ रहा है, लेकिन पेठा और घीया जैसी सब्जियों की खरीद कमजोर होने से लागत तक नहीं निकल पा रही। उन्होंने कहा कि सब्जी की खेती अब घाटे का सौदा साबित हो रही है। बुद्धि देवी ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते फसल को दिन में दो बार पानी देना पड़ रहा है। खेतों में जहरीले जीव-जंतुओं के बीच रहकर खेती करनी पड़ती है, लेकिन इसके बावजूद सब्जियां मंडी तक ले जाने के लिए पिकअप वाहन का किराया तक नहीं बचता। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के छाजूराम रावत ने सरकार से मांग की कि सब्जी उत्पादक किसानों को घाटे की भरपाई योजना का लाभ दिया जाए। साथ ही घाटे वाली सब्जियों पर सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए।