श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग द्वारा शनिवार को स्वर्णप्राशन संस्कार का आयोजन किया गया, जिसमें 2018 के बाद जन्मे बच्चों को स्वर्णप्राशन की बूंदें पिलाई गई। इसका उद्देश्य बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि, स्मरण शक्ति एवं संपूर्ण विकास को बढ़ाना है। कौमारभृत्य विभाग के चेयरमैन प्रो. वैद्य शंभू दयाल शर्मा ने बताया कि कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान के मार्गदर्शन में हर पुष्य नक्षत्र के दिन विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अस्पताल परिसर में शिविर लगाया जाता है, जिसमें अनुभवी वैद्यों की देखरेख में स्वर्णप्राशन संस्कार विधि पूर्वक किया जाता है। स्वर्णप्राशन बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। वैद्य प्रो. वैद्य अमित कटारिया ने बच्चों के अभिभावकों को स्वर्णप्राशन के लाभों के बारे में जागरूक किया और बताया कि हर पुष्य नक्षत्र के दिन यह संस्कार बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है और बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाता है तथा बार-बार बीमार पड़ने वाले बच्चों को स्वास्थ्य लाभ देता है। स्वर्णप्राशन वैदिक काल से चली आ रही विधि स्वर्णप्राशन एक आयुर्वेदिक विधि है, जिसमें शुद्ध स्वर्ण भस्म, घृत (घी), मधु और कुछ औषधियों के मिश्रण को विशेष विधि से तैयार कर बच्चों को दिया जाता है। यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में कारगर मानी जाती है। पुष्य नक्षत्र पर 31 मई को लगेगा शिविर : डॉ. चौधरी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र चौधरी ने अधिक से अधिक अभिभावकों से अपील की कि वे आगामी पुष्य नक्षत्र 31 मई पर आयोजित होने वाले स्वर्णप्राशन संस्कार में भाग लेकर अपने बच्चों को इस प्राचीन,सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक संस्कार का लाभ दिलाएं।