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कुरुक्षेत्र: अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन

शाहिल शर्मा Updated Sun, 08 Mar 2026 08:56 PM IST

महिलाएं आज भी घर से लेकर कार्यस्थल तक शोषण का शिकार हो रही है। उन्हें आज भी दबाया जा रहा है। उन्हें पूरा सम्मान व अधिकार दिए जाने आज भी दावों तक ही सिमटे हैं। मां की कोख से लेकर जीवन भर संर्घष करने को मजबूर रहती है। पुरूषों की बराबरी तो दूर उन्हें अपना जीवन जीने का भी उचित माहौल नहीं मिल पा रहा। ऐसे में समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है। रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से महिला सशक्तिकरण विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने यह आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है तब तक उन्हें पूरी तरह से सशक्त नहीं माना जा सकता। महिलाओं को और अधिक सशक्त करने के लिए सार्थक प्रयास करने होंगे। आगे बढ़ती महिलाओं को हर जगह रोका जा रहा : डॉ रूकमेश डीएन महिला महाविद्यालय में इतिहास विभागाध्यक्ष एवंभारत तिब्बत संघ में राष्ट्रीय महामंत्री डॉ रूकमेश चौहान का कहना है कि आज महिलाएं आगे बढ़ना चाहती है और वे अपनी सार्थकता साबित कर चुकी है इसके बावजूद उन्हें हर जगह रोका ही जा रहा है। महिलाएं अपने-साथ परिवार की जिम्मेदारी व समाज की परवाह के बीच ही फंसकर रह गई है। आज भी महिला पूरी तरह से आजाद नहीं हो पाई है। उन्हें आज भी पुरूष समाज पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। इसके पीछे समाज की जागरूकता का अभाव है। पुरूष व महिलाएं एक समान होकर जब आगे बढ़ेंगे तो ही बेहतर समाज व देश का निर्माण संभव है।

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