जिला में नदियों में आया उफान शांत नहीं हो रहा है। मारकंडा, राक्षी व सरसवती नदियाें में उफान और बढ़ रहा है, जिससे जलभराव व बाढ़ के हालात गंभीर ही होते जा रहे हैं। मारकंडा का जलस्तर सुबह बढ़कर 36222 क्यूसेक तक पहुंच गया जबकि नदी का इस्माईलबाद क्षेत्र में एक जगह और करीब 50 फीट लंबा तटबंध देर रात को टूट गया है। दो दिन पहले टूटा करीब 100 फीट लंबा तटबंध अभी दुरूस्त नहीं हुआ था कि अब दूसरी जगह से भी तटबंध टूट गया है। ऐसे में अब दर्जनों गांवाें तक पानी की मार होने की संभावना बढ़ गई जबकि जबकि हजारों एकड़ फसलें पहले ही डूबी हुई है। क्षेत्र के गांव अजमतपुर व आसपास के डेरों का संपर्क पूरी तरह से कटा हुआ है। दो दिन से टूटे 100 फीट के तटबंध को दुरूस्त करने के लिए गत दिवस वीरवार को प्रयास किए गए थे लेकिन ये सफल नहीं हो पाए। उधर शाहाबाद व पिहोवा क्षेत्र में भी 20 से ज्यादा गांव जलभराव व बाढ़ से प्रभावित है जहां 50 हजार एकड़ से ज्यादा फसल डूबी है। लाडवा में भी हजारों एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा का कहना है कि जिले के हर प्रभावित गांव के ग्राम सचिव व सम्बन्धित क्षेत्र का पटवारी 24 घंटे नजर रखे हुए है और लोगों के बीच रहकर प्रशासन के माध्यम से राहत सामग्री भी पहुंचा रहे हैं। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि सनिक अधिकारी संपर्क में है और नियमित रूप से गांव और डेरों का दौरा भी कर रहे हैं। इस गांव में पशुपालन विभाग की तरफ से विशेष शिविर लगाया है ताकि इस क्षेत्र के पशुओं का चैकअप करके दवाईयां दी जा सके। इस गांव में एसडीओ डाॅ. सुरजीत, वैटनरी सर्जन डाॅ. परमजीत,वीएलडी सुनील सहित उनकी टीम शिविर में पहुंच चुकी है। इतना ही नहीं इस गांव के पशुओं के लिए पशुपालन विभाग की तरफ से चारा का भी प्रबंध किया जा रहा है।