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VIDEO : करनाल में श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन प्रवचन

भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 17 Nov 2024 08:52 PM IST

करनाल के सिग्नेचर ग्लोबल सेक्टर 28 में राधे रानी सखी संग कीर्तन मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन प्रवचन करते हुए आशीष सागर महाराज ने ध्रुव की कहानी सुनाते हुए महिलाओं से अनुरोध किया कि अपने बच्चों को मोबाइल दोगे तो कैसे वह ध्रुव बनेगा। मोबाइल फोन से निकलने वाली रेंंस बहुत खतरनाक है इससे बच्चों को बचा कर रखे। आज की मां अपनी सुविधा के लिए बच्चों के हाथ में मोबाइल थमा देती है जिससे हमारी संस्कृति खराब हो रही है। हम अपनी संस्कृति को खोते जा रहे है, जो हमारे लिए और समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा है। आज का युवा विदेश की ओर मुंह कर रहा हैं, ये भी हमारी संस्कृति के लिए खतरा हैं। यहां से विदेश जाने के बाद वापिस आने का नाम ही नही लेते कई मां बाप तो अंतिम समय में अपने बच्चों को भी नही देख पाते। कईयों को तो मरे हुई भरी कई कई दिन हो जाते है जब मकान से बदबूं आती है तभी पता चलता हैं ऐसे रुपए किस काम के। आशीष सागर ने बताया कि एक राजा थे उत्तानपाद उनकी दो रानियां थी सुनीति और सुरुचि। सुनीति शांत स्वभाव की थी और सुरुचि बहुत घमंडी थी। रानी सुनीति के बेटे का नाम था ध्रुव और रानी सुरुचि के बेटे का नाम था उत्तम। एक दिन ध्रुव अपने पिता उत्तानपाद की गोद में खेल रहा था। तभी रानी सुरुचि ने आकर ध्रुव को राजा की गोद से नीचे उतार दिया और कहा, तुम राजा की गोद में नहीं बैठ सकते। राजा की गोद पर सिर्फ मेरे बेटे का अधिकार हैं। सुनीति की बात से ध्रुव बहुत दुखी हुआ। उसने जाकर सारी बात मां को बताई। मां ने ध्रुव से कहा भगवान की भक्ति में बहुत शक्ति है। अगर तुम सच्चे मन से भगवान की भक्ति करोगे तो तुम्हें पिता की गोद तो क्या भगवान की गोद में जगह मिल सकती है। पांच साल का निडर ध्रुव भगवान को पाने के लिए जंगल में चला गया। नारद ने ध्रुव को जंगल की ओर जाते देखा तो उसे समझाकर महल वापस भेजने की कोशिश की। पर ध्रुव का इस बात से कोई फर्क नही पड़ा। ध्रुव के पक्के इरादे से खुश होकर नारदजी ने उसे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने के लिए कहा। जंगल में कई महीनों तक भगवान से प्रार्थना करता रहा। ध्रुव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान उसके सामने प्रकट हुए और मनचाहा वरदान मांगने को कहा। ध्रुव बोला प्रभु मुझे आपकी गोद में बैठना है। भगवान ने ध्रुव को गोद में बिठाकर आशीर्वाद दिया कि उसका नाम हमेशा अमर रहेगा। हम ध्रुव को आसमान में सबसे ज्यादा चमकने वाले ध्रुव तारे के नाम से जानते हैं।

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