आरएसएस के प्रचारक स्वामी इंद्रेश ने करनाल में आयोजित गीता सत्संग में श्रद्धालुओं को जीवन के मूल्यों और सत्कर्म के महत्व पर गहन विचार प्रदान किए। उन्होंने कहा कि क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाओगे? खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है, लेकिन असली सवाल यह है कि हमारे जीवन का आंतरिक महत्व क्या है। सत्कर्म से मोक्ष की प्राप्ति संभव स्वामी इंद्रेश ने प्रवचन में समझाया कि मनुष्य का जीवन सत्कर्म के लिए है। यदि वह सत्कर्म करता है, तो स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि धन, संपत्ति, आभूषण, वस्त्र। यह सब भौतिक वस्तुएं हैं, जिनका कोई स्थायी महत्व नहीं। यह सब यही रह जाता है, लेकिन सत्कर्म साथ जाता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी ने धन कमाया और उसे दान में लगाया, तो उसने सत्कर्म किया। यदि किसी ने विद्या अर्जित कर दूसरों को शिक्षित किया, तो उसने भी सत्कर्म किया। यदि किसी ने देश से प्रेम किया और उसके लिए बलिदान दिया, तो यह भी एक श्रेष्ठ कर्म है।