फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैथल: बंद नहीं हो रहा जर्जर बसों को कैथल भेजने का सिलसिला, पलवल के बाद रेवाड़ी से पहुंची 10 जर्जर बसेंं

शाहिल शर्मा Updated Sat, 05 Jul 2025 08:31 PM IST

सरकार की ओर से जर्जर बसों के कैथल डिपो भेजने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है। अब शनिवार को पलवल के बाद रेवाड़ी से भी 10 जर्जर बसें कैथल डिपो में पहुंची हैं। इन बसों की हालत इतनी खराब है कि यह रूट पर दौड़ाने लायक नहीं है। इन बसों के शीशे टूटे हुए हैं और सीटें भी पूरी तरह से फटी हुई हैं। यहां तक कई सीटों पर तो लोहे का ढांचा तक निकला है। ऐसे में यह बसें यात्रियों के लिए आरामदायक कैसे साबित हो पाएंगी। यह आमजन के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। पिछले साल नवंबर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदेश के एनसीआर में आने वाले जिलों में ग्रैप लागू किया गया था। इसके बाद बीएस- तीन और चार तकनीक की बसों का संचालन बंद किया गया था। इसके बाद एनसीआर में आने वाले जिलों से दूसरे जिलों में बसों को भेजने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया के तहत अब तक कैथल डिपो के बेड़े में पिछले आठ महीने में 70 जर्जर बसें शामिल हो चुकी हैं। जबकि 48 बीएस-छह तकनीक की बसें एनसीआर जिलों में भेजी जा चुकी है। इन जर्जर बसों के आने के बाद डिपो के बेड़े में बसों की संख्या तो 200 पार कर 202 हो चुकी है। परंतु इस बसों के लगातार खराब रहने के कारण रूट पर समस्या कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही है।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें