सत्संग में भक्ति के मोती बिखरे होते हैं। हमें उन्हें इकट्ठा करना होता है। यह प्ररेणादायक विचार सत जिंदा कल्याण आश्रम कलानौर के गद्दीनशीन महंत श्री 1008 खुशहाल दास महाराज ने कहे। वह रविवार को संत जिंदा कल्याणा सेवा समिति झज्जर की ओर से पंजाबी धर्मशाला में आयोजित श्री सुंदरकांड पाठ में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सत्संग वह अमृत है, जो आत्मा को पोषण देता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है। सत्संग से जुड़ते ही व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है। गुरु और संत हमेशा सेवा की भावना से कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। निस्वार्थ भाव से की गई सेवा हमेशा विशेष फल देने वाली होती है। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित महिलाओं एवं पुरुषों ने रविवार को हुए सत्संग का आनंद उठाया और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।