बुढ़ापा पेंशन पर लगी तमाम शर्तों, बुढ़ापा पेंशन बढ़ाकर 5000 रुपये महीना करने, प्राइवेट बसों में मिली विद्यार्थियों को छूट और बुजुर्गों का आधा किराया बहाल करने की मांग को लेकर बुधवार को ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय में विरोध प्रदर्शन किया और उपायुक्त की मार्फत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी ने कहा कि सरकार का कहना है कि परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में सभी स्रोतों से 3 लाख सालाना से अधिक आमदनी वाले बुजुर्ग नागरिक बुढ़ापा पेंशन के पात्र नहीं होंगे। इस नाजायज शर्त से प्रदेश के आधे से ज्यादा बुजुर्गों की पेंशन बंद हो जाएगी। इसमें रबी व खरीफ की फसल अनाज मंडी में बेचकर किसान के खाते में जो पैसा आता है, वह भी शामिल है। सरकार यह नहीं देखती कि बिक्री की रकम से लागत खर्च निकालने के बाद किसान को आखिर बचता ही कितना है। कितने ताजुब की बात है कि सरकार मंडी में फसल बिक्री की रकम को किसान की विशुद्ध आमदनी मानती है। इसे पारिवारिक आय से जोड़ना एकदम गलत है। जिला कमेटी सदस्य ओमबीर सिंह ने कहा कि एक अन्नदाता किसान और सभ्यता का निर्माता मजदूर पूरी जिंदगी समाज के निर्माण और उत्पादन में खपा देता है तो उसे बुढ़ापे में सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार का दायित्व बनता है। असल में बुढ़ापा पेंशन पर कोई भी शर्त लगाना पूरी तरह से सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। जिला कमेटी सदस्य जिले सिंह ने कहा कि कि बुढ़ापा पेंशन, पेंशन न होकर एक सम्मान भत्ता है। इसके लिए कोई शर्त नहीं रखी जानी चाहिए। सरकार कानून बनाकर इस पर लगी हुई आमदनी की तमाम शर्तें हटाए। अब तो सरकार ने जनता के दबाव में काटी गई पेंशन जारी कर दी है, लेकिन शर्तें तो बरकरार हैं और कभी भी लागू की जा सकती हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार की मिलीभगत से प्राइवेट बस संचालकों ने विद्यार्थियों के किराए में छूट और बुजुर्गों का आधा किराया बंद कर दिया गया है। पहले की तरह इसे बहाल और सुनिश्चित किया जाए। इस अवसर पर इस अवसर पर सतबीर सिंह, जगदीश, जगमाल सिंह, ओमबीर सिंह, जिलेसिंह, जगदीश,जगमाल सिंह, सुरेश देवी उपस्थित रहे।