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कैंसर को हराकर योग की राह चुनी, 62 की उम्र में अधिवक्ता ने हासिल की पीएचडी

झज्जर। पहले कोरोना, उसके बाद पहली स्टेज का कैंसर, वजन 35 किलोग्राम रहने के बावजूद गोच्छी गांव हाल रोहतक के प्रेम नगर निवासी एडवोकेट श्यामफूल भारद्वाज ने मिसाल कायम की है। शारीरिक दिक्कतों को योग से दूर कर उन्होंने 62 साल की उम्र में वकीलों के मानसिक तनाव और व्यक्तिपरक कल्याण पर एकीकृत योग मॉड्यूल के प्रभावों की जांच पर पीएचडी है। श्यामफूल 1994 यानी पिछले 30 साल से रोहतक और झज्जर में वकालत की प्रेक्टिस कर रहे हैं। अप्रैल 2021 में वह कोरोना की चपेट में आ गए थे। उनका वजन मात्र 35 किलोग्राम रह गया था। श्यामफूल बताते हैं कि परिजन भी उनको गांव ले आए थे और अंतिम तैयारी करने लग गए थे, लेकिन उनका शुरू से ही योग में रुझान रहा था। योग से कोरोना दूर हुआ। 2021 में उनकी एमए प्रथम वर्ष की परीक्षा थी। इस दौरान जुलाई में उनको टाइफाइड हो गया। उससे रिकवर हुए तो परीक्षा से एक माह पहले जोंडिस हो गया। वह आयुर्वेद कॉलेज ब्राह्मणवास में पंचकर्म कराने गए, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी हालत देखकर मना कर दिया था। आयुर्वेद से इलाज कराया। 2022 में योग एंड नेचुरोपैथी में एमए पूरी की। योग में रुझान होने के कारण पीएचडी करने का मन बनाया। जनवरी 2023 में पीएचडी में रजिस्ट्रेशन कराया। श्याम फूल बताते हैं कि जब उन्होंने अपना टॉपिक कमेटी के सामने रखा तो उन्होंने पहले इसे मानने से इन्कार कर दिया, लेकिन वह यही टॉपिक चाहते थे। बाद में इसी टॉपिक में झज्जर व रोहतक के वकीलों पर रिसर्च की। जनवरी 2024 में लीवर में कैंसर की प्रथम स्टेज का पता चला, लेकिन श्यामफूल टूटने की बजाय मजबूती से डटे रहे और आयुर्वेद से अपना इलाज कराया। यहां तक की परिवार में पत्नी और बच्चे को भी इसके बारे में नहीं बताया। आयुर्वेद व योग से इलाज कराने के बाद टेस्ट कराए तो रिपोर्ट नार्मल आई। अब माधव यूनिवर्सिटी, पिंडवाड़ा, सिरोही (राजस्थान) से श्यामफूल की पीएचडी पूरी हो गई है। अधिवक्ता श्यामफूल ने बताया कि कोरोना की चपेट में आने के बाद लोगों की दुआओं, आशीर्वाद और योग से मिले जीवनदान ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। वर्ष 2022 में योग एवं नैचुरोपैथी में एमए की पढ़ाई के दौरान उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि परमात्मा ने उन्हें जो जीवन दोबारा दिया है, उसे किसी नेक उद्देश्य के लिए समर्पित करेंगे। उन्होंने अपने शोध कार्य का श्रेय अपने मार्गदर्शक योगी डॉ. अनिल कश्यप को दिया, जिनके मार्गदर्शन और सहयोग के बिना यह कार्य पूरा करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि वकालत का पेशा लंबे समय तक चलने वाले मामलों, न्यायिक प्रक्रियाओं, पेशेवर दबाव और लगातार मानसिक तनाव से जुड़ा रहता है। ऐसे में योग के माध्यम से अधिवक्ताओं के मानसिक तनाव को कम करने की संभावनाओं पर शोध भविष्य के लिए उपयोगी आधार बन सकता है। 2023 में दसवीं व बारहवीं में संस्कृत विषय पास किया श्याम फूल ने वर्ष 2023 में दसवीं व बारहवीं में संस्कृत विषय की परीक्षा भी पास की है। बोर्ड की तरफ से विशेष चांस के तहत यह परीक्षा पास की। उन्होंने आठवीं तक संस्कृत की पढ़ाई की थी। इसके तहत उन्होंने संस्कृत की परीक्षा पास की है। इसके अलावा वह 1995 में लेबर लॉ का डिप्लोमा भी कर चुके हैं। वह आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं।

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