सुखद भविष्य के लिए आयुर्वेद" विषय पर अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन की ओर से राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिला आयुर्वेद अधिकारी डाॅ. सुमन राठी ने शिरकत की। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद की लोकप्रियता बढ़ रही है। अब समय आ गया है कि आयुर्वेद डॉक्टर इसकी विश्वनीयता सिद्ध करें। इस अवसर पर हृदयाघात पर एक सीएमई कार्यशाला का आयोजन किया गया। शहर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल गुप्ता ने हृदयाघात के दौरान सद्य-चिकित्सा पर प्रकाश डालते हुए हृदय रोगों के उपचार व बचाव के उपाय बताए। वशिष्ठ वक्ता के रूप में रोहतक अष्टांग आयुर्वेद संस्थान के प्रधान डॉ. संजय जाखड़ ने कहा कि गलत खानपान और गलत जीवन शैली ने रोगों में वृद्धि की है। अतः इनमें सुधार लाने से ही रोगों से बचाव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में पंचकर्म आयुर्वेद की अद्भुत देन है। संतर्पण जन्य रोगों में रोग सम्प्राप्ति को पंचकर्म विधि तोड़ देती है और रोगी शीघ्र व स्थाई तौर पर रोगमुक्त हो जाते हैं। योगाचार्य आचार्य बलदेव ने योग, प्राणायाम और व्यायाम पर जानकारी दी। उनके अनुसार आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य योगादि साधनों से प्राप्त होता है। सम्मेलन के संरक्षक डॉ. रवींद्र मलिक, अध्यक्ष डॉ. नरेश दलाल, उपाध्यक्ष डॉ. पवन राज्याण, सचिव डॉ. रवि गोदारा, सह सचिव डॉ. विजय कंकरवाल और महिला अध्यक्ष डॉ. ज्योति गोदारा उपस्थित रहे।