हांसी त्योहारों से पहले चीनी के दामों में अचानक तेजी आने से आम आदमी की चिंता बढ़ गई है। कुछ समय पहले करीब 53 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी के थोक भाव बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं, फुटकर बाजार में परिवहन और अन्य खर्च जुड़ने के बाद चीनी करीब 64 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। कुछ दुकानों पर खुदरा भाव इससे भी अधिक बताए जा रहे हैं। पिछले दो से तीन दिनों में आई तेजी का असर सीधे लोगों की रसोई के बजट पर पड़ रहा है। चीनी के दाम बढ़ने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ हलवाइयों, मिठाई कारोबारियों और चाय की दुकानों पर भी लागत का दबाव बढ़ गया है। दशहरे और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है। हांसी के चीनी थोक व्यापारी दिनेश सिंगला के अनुसार, चीनी के भाव में अचानक तेजी आई है। थोक बाजार में ही कीमतें बढ़कर करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। परिवहन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद फुटकर बाजार में चीनी करीब 64 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। उन्होंने बताया कि बाजार में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में त्योहारों के दौरान कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। बाजार में चीनी के दाम बढ़ने के पीछे मिलों में पुराने स्टॉक की उपलब्धता कम होने और नई चीनी की आवक सीमित रहने की बात कही जा रही है। इसके अलावा गन्ने से बनने वाले एथेनॉल के उत्पादन को भी चीनी की उपलब्धता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, कीमतों में तेजी के वास्तविक कारणों और आपूर्ति की स्थिति को लेकर संबंधित आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। चीनी महंगी होने का असर केवल चाय और दूध तक सीमित नहीं है। मिठाइयां बनाने वाले हलवाइयों और छोटे कारोबारियों की उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। चीनी के दामों में लगातार तेजी रही तो बूरा, खांड, बताशे और अन्य मिठाइयों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। पहले से ही आटा, दाल, तेल और सब्जियों की कीमतों से परेशान लोगों के लिए चीनी का महंगा होना एक और झटका है। अब त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बाजार में चीनी की आपूर्ति सामान्य होने और कीमतों में स्थिरता आने पर टिकी है।