20 साल पहले सिरसा में सरकारी स्कूल से सटी हड्डारोड़ी को फूलों के पार्क में तब्दील कर देने वाले डॉ. रामजीलाल जयमल आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पौधरोपण के प्रति लोगों को जागरूक करने और निशुल्क पौधे वितरित करने के जुनून के कारण लोग उन्हें फ्लावरमैन के नाम से जानते हैं। रामजीलाल देश-प्रदेश में अब तक करोड़ों पौधे वितरित कर चुके हैं। देशभर में उनकी 928 नर्सरियां चल रही हैं। शुक्रवार को ट्रैक्टर ट्रेनिंग सेंटर में पौधे वितरण कार्यक्रम में पहुंचे रामजीलाल ने अपना सफरनामा साझा किया। सिरसा के दड़बी गांव में एक कच्चे घर में जन्मे डॉ. रामजीलाल जयमल ने फूलों से ऐसी खुशबू बिखेरी कि उनका नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक उठा। कचरे ढेरों को हटाकर फूलों से उन्होंने न जाने कितनी जगहों को महकाया है। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। उनके जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘बिफोर आई डाई’ यानी इससे पहले कि मैं मर जाऊं भी बनी है।