हांसी की अनाज मंडी में धान की खरीद और उठान की धीमी प्रक्रिया किसानों और आढ़तियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। मंडी में धान की आवक लगभग 47 हजार क्विंटल तक पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद केवल 16 हजार क्विंटल ही हुई है। उठान की धीमी गति के कारण मंडी में धान के ढेर बढ़ते जा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और आढ़तियों को जगह की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश की आशंका से बढ़ी किसानों की चिंता आने वाले सप्ताह में बारिश की संभावना ने किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है। मंडी में बड़ी मात्रा में धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। यदि बारिश होती है, तो किसानों की मेहनत से तैयार की गई फसल के भीगने और खराब होने का खतरा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों का आरोप है कि धान की खरीद समय पर नहीं हो रही है और निजी खरीद में भी फसल के भाव में कटौती की जा रही है। गेहूं की आवक से मंडी प्रबंधन के लिए चुनौती धान की खरीद और उठान में देरी के बीच, आने वाले समय में गेहूं की भारी आवक शुरू होने की संभावना मंडी प्रबंधन के लिए एक और चुनौती पेश कर सकती है। हांसी मंडी का क्षेत्र सीमित होने के कारण, यदि धान का उठान समय पर नहीं हुआ और गेहूं की आवक बढ़ गई, तो फसल रखने के लिए जगह की कमी हो सकती है। इससे किसानों और आढ़तियों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है। किसान की मांगें किसान बलवान ने धान की सरकारी खरीद में तेजी लाने, निजी खरीद में उचित भाव सुनिश्चित करने और मंडी में जमा फसल का जल्द उठान करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे बारिश से फसल को बचाने के साथ-साथ आगामी गेहूं सीजन के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सकेगी।