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चरखी-दादरी में बिजली निगम के निजीकरण के प्रयास पर उबाल, गरीब उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के निजीकरण और समानांतर लाइसेंस व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को लेकर बिजली कर्मचारियों और आम जनता में रोष बढ़ रहा है। बिजली बोर्ड कर्मचारियों के साझा संघर्ष मोर्चे ने सरकार की इस पहल पर सवाल उठाते हुए इसे गरीबों, किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों के विपरीत बताया है। मीडिया से बातचीत करते हुए मोर्चे से जुड़े एक वक्ता ने कहा कि समानांतर लाइसेंस व्यवस्था लागू होने से बिजली वितरण क्षेत्र में निजी कंपनियों का दखल बढ़ेगा। इससे वर्तमान में लागू क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इस व्यवस्था के माध्यम से जरूरतमंद उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है, जबकि अधिक खपत और औद्योगिक उपयोग वाले उपभोक्ताओं से अपेक्षाकृत अधिक शुल्क लिया जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि निजी कंपनियां अधिक लाभ देने वाले बड़े औद्योगिक और प्रीमियम उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देंगी। ऐसे में सरकारी बिजली वितरण निगम के पास सामान्य उपभोक्ताओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की जिम्मेदारी रह जाएगी, जिससे मौजूदा व्यवस्था पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। इसका असर भविष्य में आम लोगों को मिलने वाली बिजली की दरों और सुविधाओं पर पड़ने की आशंका है। वक्ता ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार और निजी कंपनियां इस व्यवस्था को जनहितकारी मानती हैं तो इसकी शुरुआत चरखी दादरी के किसी ग्रामीण क्षेत्र से करके दिखाई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पहल से बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचने की संभावना है, जबकि किसानों और गरीब परिवारों के हितों की अनदेखी हो सकती है। एकजुटता से विरोध करने का आह्वान बिजली बोर्ड कर्मचारियों के साझा संघर्ष मोर्चे ने स्पष्ट किया कि वह निजीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। मोर्चे ने किसान संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से एकजुट होकर इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

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