गाय के गोबर से सबसे पहले बनीं गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा ने उरई की गिरजा महिला बाल विकास सेवा संस्थान को 15 साल में विदेश तक पहुंचा दिया है। एक उत्पाद से शुरु किया गया कारोबार अब 201 तक पहुंच चुका है। देश में उत्पादों की बढ़ती मांग को यह संस्था पूरा कर नहीं पा रही है। उनका कहना है कि विदेश से कई अब तक ऑर्डर मिल चुके हैं,लेकिन देश में ही उत्पादों की काफी मांग है। संस्था की अध्यक्ष राधा पांडेय ने बताया कि मां ने 10 साल पहले गाय के गोबर से गणेश लक्ष्मी को बनाया था। तब लोग कहते थे कि कोई कुछ नहीं खरीदेगा,लेकिन मां के विश्वास को कोई तोड़ नहीं पाया। उन्होंने कार्य को शुरु रखा। उनके साथ महिलाओं का कारवां जुड़ता चला गया। घर के सजावटी सामान से लेकर गले के माले,कान की बालियां जैसे कई उत्पादों को भी बनाना शुरु कर दिया गया। इसके साथ ही ईंटें, कागज, अगरबत्ती, मोबाइल स्टैंड, मूर्तियां और यहां तक कि सौंदर्य प्रसाधन जैसे साबुन और टूथपेस्ट भी बनाए जा रहे हैं। उत्पादों की मांग इतनी होती कि अब महिलाओं से वर्क फार्म होम काम कराना पड़ता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 650 से अधिक गाय पाली हुई हैं। उनके गोबर से बायो गैस,पेंट से लेकर अन्य कई कार्य किए जा रहे हैं। सबसे अधिक गाय के गोबर से बनीं मैट को लोग उपयोग करने के लिए खरीद रहे हैं। मैट से उनकी कमर में दर्द की शिकायत दूर हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था में महिलाएं ही काम कर रही हैं। राधा ने बताया कि उनके साथ 150 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। जो हर माह 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। महिलाएं संस्था के जरिए स्वदेशी को भी बढ़ावा दे रही हैं। गाय के गोबर से बनी राखियों की मांग को वह पूरी नहीं कर पाई थी। उन्हें करीब 7 हजार राखियों का ऑर्डर मिला था।