मानसून के दौरान गुरुग्राम में होने वाले जलभराव के स्थायी समाधान के लिए अब बरसाती पानी को शहर से बाहर निकालने के बजाय शहर और आसपास के क्षेत्रों में ही रोककर भूजल रिचार्ज करने की रणनीति पर काम किया जाएगा। इसके लिए तालाब, इंजेक्शन वेल और अरावली में बांध बनाकर पानी संचय पर जोर दिया जाएगा। हरियाणा शहरी विकास विभाग के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जलभराव से निपटने के उपायों पर मंथन किया और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएस ढेसी ने जीएमडीए और दोनों नगर निगमों को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए। मानेसर निगम क्षेत्र में शामिल गांवों में कम से कम 15 ऐसे गांव चिन्हित किए जाएं, जहां बड़े जलाशय बनाकर बरसाती पानी को रोका जा सके। निगम क्षेत्र के 30 गांवों में 85 जोहड़ और तालाब हैं। अरावली क्षेत्र में पहाड़ियों और प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में ही बरसाती पानी रोकने की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि पानी को प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में संग्रहित किया जा सके तो शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर दबाव कम किया जा सकता है।