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बिहार न्यूज: गंडक का तटबंध टूटा, गांवों में घुसा पानी; घर-खेत डूबे, बांध पर शरण लेने को मजबूर परिवार

Sun, 04 Oct 2026 07:47 AM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण

गंडक नदी का पानी बढ़ने के साथ सारण में बाढ़ का संकट गहरा गया है। मकेर प्रखंड के हैजलपुर और बाघाकोल के पास तटबंध टूटने के बाद तेज धार ने आसपास के गांवों का रुख कर लिया। पानी इतनी तेजी से फैला कि देखते ही देखते घर, खेत और सड़कें जलमग्न हो गईं। हालात बिगड़ने के बाद कई परिवार घर-बार छोड़कर नहर के बांध और दूसरे ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। 30 सितंबर को बाघाकोल के पास करीब 10 फीट तटबंध टूटने की सूचना सामने आई थी। इसके बाद आसपास के निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल गया। हैजलपुर और बाघाकोल में हुई तटबंध की टूटन का असर अब सिर्फ इन इलाकों तक सीमित नहीं है। गंडक में बढ़ते पानी और उसके फैलाव से मकेर के अलावा पानापुर, तरैया, अमनौर, परसा, दरियापुर और सोनपुर के कई इलाकों में भी बाढ़ का संकट गहरा गया है। मकेर-अमनौर क्षेत्र में बड़ी आबादी इसकी चपेट में आई है और पानी एनएच-722 तक पहुंच गया। बांध पर रात काट रहे परिवार, भोजन और सुरक्षित ठिकाने की चिंता हैजलपुर और बाघाकोल के आसपास का मंजर बाढ़ की गंभीर स्थिति को दिखा रहा है। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक चूल्हे जल रहे थे, वहां अब पानी भरा है। परिवार अपने बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को लेकर सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग नहर के बांध पर शरण लिए हुए हैं और खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता भोजन, पीने का पानी, शौचालय, रोशनी, दवा और सुरक्षित आश्रय की है। जैसे-जैसे पानी बढ़ रहा है, लोगों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। प्रशासन की ओर से बचाव और राहत कार्य चलाए जाने की जानकारी है, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जरूरत के मुकाबले मौजूदा व्यवस्थाएं कम हैं। तटबंध टूटने के बाद जनप्रतिनिधियों से ग्रामीणों के सवाल तटबंध टूटने के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लेकर नाराजगी भी दिखाई दे रही है। नहर के बांध पर रह रहे ग्रामीण स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी और विधायक कृष्ण कुमार मंटू समेत जनप्रतिनिधियों से सवाल कर रहे हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद तटबंध की सुरक्षा क्यों नहीं हो सकी।

ग्रामीणों की यह शिकायत और नाराजगी है। तटबंध टूटने के वास्तविक कारण और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है, इसका अंतिम निर्धारण जांच तथा संबंधित विभाग की रिपोर्ट के आधार पर ही होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ हर साल आती है, लेकिन तटबंध को मजबूत करने और स्थायी समाधान की जरूरत का सवाल हर बार सामने रह जाता है। अब प्रभावित परिवारों के सामने सिर्फ पानी कम होने का इंतजार नहीं है। उनके लिए बड़ा सवाल यह भी है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद टूटे तटबंधों को किस तरह मजबूत किया जाएगा, ताकि अगली बारिश में गांवों के लोगों को फिर घर छोड़कर बांध पर शरण लेने की नौबत न आए।

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