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कबीर के 5 चुनिंदा दोहे जिनमें छुपा जीवन का मर्म

साहित्य
                
                                                         
                            मन के मते न चलिये, मन के मते अनेक 
                                                                 
                            
जो मन पर असवार है, सो साधु कोई एक ।।

भावार्थ:-
मन के मत में न चलो, क्योंकि मन के अनेको मत हैं। जो मन को सदैव अपने अधीन रखता है, वह साधु कोई विरला ही होता है।  आगे पढ़ें

2 घंटे पहले

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