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"शिक्षक" व छात्र

Arvind Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कपहले-पहले शिक्षक का चाँटा लगा
        
                                                    
                            
हो गये लाल-लाल गाल
रोते हुए अगर घर आते
माता -पिता जान जाते
शेतानी की बात भांप जाते
घर पर डांट फटकार करते
टीचर भी मनोयोग से करते भला
अव्वल होने का मिल जाये लाभ
अब बदला-बदला हुआ जमाना
छात्र घूमता और लगाता है कश
शिक्षक को अगर हो जाता है शक
कालेज से निकालने का सुनाता फरमान
"गोली"चला छात्र बनाता अपनी पहचान
अब नहीं करना चाहते शिक्षक का सम्मान

गुरु का करे सम्मान न हो अपमान

अरविन्द कुमार शर्मा

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